फोटो में दिख रही है भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक के माध्यम से अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में जन्मी पहली बछिया, जिसका जन्म 1 नवंबर 2026 को गराचरमा पशु चिकित्सालय के कार्यक्षेत्र में हुआ।  
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अंडमान में भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक से पहली बछिया का जन्म

वैज्ञानिक पशुपालन पहल को मिली बड़ी सफलता

SANJIB KUMAR ROY

सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजय पुरम -- अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में पशुपालन और दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की गई है। अंडमान एवं निकोबार प्रशासन के पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवा विभाग ने भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक के माध्यम से द्वीपसमूह की पहली बछिया के जन्म की सफलता हासिल की है। यह बछिया 1 नवंबर 2026 को गराचरमा पशु चिकित्सालय के कार्यक्षेत्र के अंतर्गत कामराज नगर निवासी श्रीमती के. प्रिया की गाय से पैदा हुई। विभाग के अनुसार, गाय और नवजात बछिया दोनों स्वस्थ हैं तथा प्रसव सामान्य रूप से संपन्न हुआ।

विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस बछिया के जन्म के लिए भ्रूण प्रत्यारोपण की प्रक्रिया 10 फरवरी 2026 को पूरी की गई थी। इसके बाद 20 मार्च 2026 को गाय के गर्भवती होने की पुष्टि हुई थी। जन्म के बाद बछिया का वजन उसकी छाती की गोलाई और शरीर की लंबाई के आधार पर मापा गया, जो 21.3 किलोग्राम पाया गया। इस सफल जन्म के साथ ही द्वीपसमूह में शुरू की गई भ्रूण प्रत्यारोपण परियोजना के पहले चरण को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। यह परियोजना इसी वर्ष राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की डेयरी सेवाओं के सहयोग से शुरू की गई थी।

भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक परियोजना का मुख्य उद्देश्य स्थानीय नस्लों के मवेशियों की आनुवंशिक गुणवत्ता में तेजी से सुधार करना, मादा बछियों के जन्म का अनुपात बढ़ाना, दूध उत्पादन की क्षमता को बेहतर बनाना और केंद्रशासित प्रदेश में दुग्ध विकास को गति देना है। इस परियोजना के तहत फरवरी 2026 में दक्षिण अंडमान के चयनित क्षेत्रों से भ्रूण प्रत्यारोपण की प्रक्रिया शुरू की गई थी। द्वीपसमूह में इस तकनीक के माध्यम से पहली मादा बछिया का जन्म होना इस बात का महत्वपूर्ण प्रमाण है कि उन्नत प्रजनन तकनीक यहां की भौगोलिक और स्थानीय परिस्थितियों में भी सफलतापूर्वक अपनाई जा सकती है।

इस उपलब्धि से भविष्य में पशुपालन के क्षेत्र में आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के विस्तार का रास्ता भी खुला है। विभाग का मानना है कि इससे स्थानीय मवेशियों की गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और पशुपालकों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में सहायता मिलेगी।

पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवा विभाग ने इस सफलता के लिए लाभार्थी पशुपालक और भ्रूण प्रत्यारोपण, गर्भावस्था की निगरानी तथा सुरक्षित प्रसव की प्रक्रिया में शामिल पशु चिकित्सकों एवं संबंधित कर्मचारियों को बधाई दी है। विभागीय अधिकारियों ने कहा कि यह उपलब्धि अधिक से अधिक पशुपालकों को वैज्ञानिक प्रजनन पद्धतियां अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेगी।

अधिकारियों ने विशेष रूप से भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक और लिंग-चयनित वीर्य के उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया है। विभाग ने आने वाले चरणों में द्वीपसमूह के अन्य क्षेत्रों तक भी भ्रूण प्रत्यारोपण कार्यक्रम का विस्तार करने की प्रतिबद्धता जताई है, ताकि अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में दुग्ध उत्पादन और पशुपालन क्षेत्र को समग्र रूप से मजबूत किया जा सके।

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