सीटू राज्य समिति के महासचिव बी. चंद्रचूड़न की तस्वीर। 
देश/विदेश

सरकारी कार्यों की ठेकेदारी व्यवस्था के विरोध में सीटू ने उठाई आवाज

श्रमिकों के शोषण पर रोक और सीधी भर्ती की मांग

SANJIB KUMAR ROY

सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजय पुरम – अंडमान एवं निकोबार राज्य समिति, सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स (सीटू) ने अंडमान एवं निकोबार प्रशासन के अंतर्गत नियमित प्रकृति के सरकारी कार्यों को ठेकेदारों के माध्यम से कराने की व्यवस्था का विरोध किया है। इस संबंध में सीटू राज्य समिति के महासचिव बी. चंद्रचूड़न ने मुख्य सचिव, अंडमान एवं निकोबार प्रशासन को पत्र लिखकर वर्तमान व्यवस्था पर पुनर्विचार करने तथा संबंधित विभागों के माध्यम से श्रमिकों की सीधी भर्ती करने की मांग की है।

पत्र में चंद्रचूड़न ने कहा कि पिछले तीन वर्षों के दौरान प्रशासन ने नियमित प्रकृति के कार्यों के लिए श्रमिकों को आकस्मिक अथवा संविदा आधार पर सीधे नियुक्त करने की पुरानी व्यवस्था को समाप्त करते हुए ठेकेदारी के माध्यम से काम कराने की प्रक्रिया शुरू की है। उन्होंने बताया कि प्रशासन के लगभग सभी विभागों में नियमित प्रकृति के कार्यों तथा केंद्र सरकार की योजनाओं से जुड़े कार्यों के लिए भी ठेकेदारों के माध्यम से श्रमिकों की व्यवस्था की जा रही है।

सीटू ने मुख्य सचिव का ध्यान इस ओर आकर्षित किया कि पिछले तीन वर्षों के दौरान ठेकेदारों द्वारा श्रम कानूनों के गंभीर उल्लंघन और श्रमिकों के व्यापक शोषण के मामले सामने आए हैं। संगठन के अनुसार, संबंधित विभाग ठेकेदारों को श्रमिकों के वेतन का भुगतान करते हैं, लेकिन इसके बावजूद श्रमिकों को श्रम आयुक्त द्वारा निर्धारित मजदूरी नहीं दी जा रही है। श्रमिकों को अवकाश का लाभ लेने की अनुमति नहीं मिल रही है तथा उनसे आठ घंटे से अधिक समय तक काम कराया जा रहा है।

चंद्रचूड़न ने पत्र में कहा कि इस व्यवस्था के कारण श्रमिक पूरी तरह ठेकेदारों पर निर्भर हो गए हैं। ठेकेदार किसी भी कारण का हवाला देकर किसी श्रमिक को काम से हटा सकते हैं, जिससे उनकी नौकरी की सुरक्षा प्रभावित होती है। उन्होंने श्रम विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि ठेकेदारों पर नियंत्रण रखने और श्रम कानूनों के उल्लंघन के मामलों में कार्रवाई करने में विभाग पूरी तरह विफल साबित हुआ है।

सीटू ने यह भी कहा कि नियमित प्रकृति के सरकारी कार्यों को ठेकेदारों के माध्यम से कराने के कारण प्रशासन को सीधे नियुक्त श्रमिकों के मुकाबले अधिक धन खर्च करना पड़ रहा है। संगठन के अनुसार, ठेकेदारों द्वारा संबंधित कार्यों की कुल राशि का 5 से 10 प्रतिशत तक कमीशन के रूप में लिया जाता है। यह राशि अलग-अलग विभागों में ठेकेदारों के बीच प्रतिस्पर्धा के आधार पर बदलती रहती है। सीटू का कहना है कि इस अतिरिक्त खर्च के बावजूद श्रमिकों को उनके वैधानिक अधिकार और उचित सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।

संगठन ने कहा कि एक कल्याणकारी राज्य होने के नाते सरकार की जिम्मेदारी है कि वह श्रमिकों के हितों की रक्षा करे, उन्हें शोषण से मुक्त कार्यस्थल उपलब्ध कराए तथा सभी वैधानिक लाभ सुनिश्चित करे। सीटू के अनुसार, नियमित सरकारी कार्यों को ठेकेदारों के माध्यम से कराने की व्यवस्था इस उद्देश्य को कमजोर करती है, क्योंकि इसके अंतर्गत काम करने वाले श्रमिकों को विभिन्न लाभों से वंचित किए जाने और ठेकेदारों की मनमानी का शिकार होने का खतरा बना रहता है।

सीटू ने यह भी चिंता जताई कि सरकारी कार्यों की ठेकेदारी व्यवस्था के कारण द्वीपों के शिक्षित युवाओं को सम्मानजनक रोजगार के अवसरों से वंचित होना पड़ रहा है। संगठन का मानना है कि सरकारी विभागों के माध्यम से सीधे नियुक्तियां किए जाने से बेरोजगार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ श्रमिकों के जीवन स्तर में सुधार लाया जा सकता है।

सीटू ने मुख्य सचिव से वर्तमान ठेकेदारी नीति की दोबारा समीक्षा करने तथा नियमित प्रकृति के सरकारी कार्यों के लिए संबंधित विभागों के माध्यम से श्रमिकों की सीधी भर्ती करने की मांग की। संगठन ने कहा कि इससे श्रमिकों के शोषण पर रोक लगाने, बेरोजगार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने और उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर देने में मदद मिलेगी।

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