फोटो में कार निकोबार द्वीपसमूह में पाले जा रहे सूअरों का दृश्य, जो जनजातीय समुदाय के पारंपरिक खाद्य स्रोत और आजीविका का महत्वपूर्ण साधन हैं। 
देश/विदेश

कार निकोबार में लगातार सूअर मरने से सांसद ने तत्काल कार्रवाई मांगी

विशेष पशु चिकित्सा दल भेजने की मांग

SANJIB KUMAR ROY

सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजय पुरम – कार निकोबार में सूअरों को प्रभावित करने वाली एक संदिग्ध संक्रामक बीमारी के कारण अगस्त और सितंबर 2026 के दौरान द्वीप के सभी 15 गांवों में लगातार सूअरों की मौत होने की जानकारी सामने आई है। इससे पशुधन की हानि, खाद्य सुरक्षा और जनजातीय समुदाय की आजीविका को लेकर गंभीर चिंता उत्पन्न हो गई है।

30 सितंबर 2026 को लिखे एक पत्र में अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के सांसद बिष्णु पद रे ने अंडमान एवं निकोबार प्रशासन के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर सूअरों की कथित मौतों की तत्काल जांच, रोकथाम और निवारक उपाय किए जाने की मांग की। रे ने प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा अथवा अनुग्रह सहायता उपलब्ध कराने की भी मांग की।

पत्र के अनुसार, संदिग्ध बीमारी लगभग 10 अगस्त 2026 से सूअरों को प्रभावित कर रही है और कार निकोबार के सभी 15 गांवों में अलग-अलग आयु वर्ग के पशुओं की लगातार मौत होने की जानकारी दी गई है।

संबंधित ग्राम जनजातीय कप्तानों, जिनमें कार निकोबार जनजातीय परिषद के मुख्य कप्तान भी शामिल हैं, द्वारा इस मामले को कार निकोबार के पशु चिकित्सा विभाग और जिला प्रशासन के संज्ञान में पहले ही लाए जाने की जानकारी दी गई। हालांकि, कथित रूप से पशुओं की मौत का सिलसिला जारी है, जिससे जनजातीय आबादी में चिंता बढ़ रही है।

सांसद ने जोर देकर कहा कि मौतों के वास्तविक कारण का पता योग्य पशु चिकित्सा विशेषज्ञों और रोग नियंत्रण विशेषज्ञों द्वारा चिकित्सकीय परीक्षण, प्रयोगशाला जांच, रोग संबंधी परीक्षण और उचित नमूनों की जांच के माध्यम से लगाया जाना चाहिए। उन्होंने सावधान किया कि उचित प्रयोगशाला पुष्टि के बिना बीमारी को किसी विशेष संक्रमण के कारण होने वाला नहीं माना जाना चाहिए।

पत्र में मुख्य उपचार के रूप में प्रतिजैविक दवाओं के कथित उपयोग के बजाय विशेष पशु चिकित्सा रोग जांच दल की तैनाती और व्यवस्थित रोग नियंत्रण प्रक्रिया शुरू किए जाने को लेकर भी चिंता जताई गई। इसमें कहा गया कि विषाणुजनित बीमारियों के विरुद्ध प्रतिजैविक दवाएं प्रभावी नहीं होती हैं और उनका अनियंत्रित उपयोग रोग प्रबंधन को जटिल बना सकता है।

पत्र में सूअरों को कार निकोबार के जनजातीय समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण पारंपरिक खाद्य स्रोत और आजीविका की संपत्ति बताया गया है। जानकारी के अनुसार, 15 गांवों में प्रत्येक परिवार लगभग 25 से 30 सूअर पालता है, जबकि एक सूअर की कीमत उसके वजन के आधार पर लगभग 30 हजार रुपये से 40 हजार रुपये तक हो सकती है। इसलिए लगातार हो रही मौतों से प्रभावित परिवारों को काफी आर्थिक नुकसान और कठिनाई होने की बात कही गई है।

पत्र में यह भी बताया गया कि प्रभावित पशुओं और हुई मौतों की व्यापक गणना अथवा सर्वेक्षण अभी तक पूरा नहीं हुआ है, जिसके कारण प्रभावित और मृत पशुओं की संख्या से संबंधित विश्वसनीय आंकड़ों का अभाव है।

सांसद ने वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारियों, महामारी विशेषज्ञों, पशु रोग विशेषज्ञों और प्रयोगशाला विशेषज्ञों से मिलकर बने विशेष दल को कार निकोबार भेजने का अनुरोध किया। उन्होंने प्रभावित पशुओं की संख्या निर्धारित करने और मौतों के स्वरूप तथा विस्तार का आकलन करने के लिए गांववार महामारी विज्ञान और मृत्यु संबंधी सर्वेक्षण की भी मांग की।

उन्होंने कारण उत्पन्न करने वाले रोगाणु की पहचान के लिए उपयुक्त चिकित्सकीय नमूने, मृत्यु उपरांत नमूने और अन्य आवश्यक नमूने अधिकृत पशु चिकित्सा जांच प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजने की मांग की। उन्होंने सक्षम पशु चिकित्सा अधिकारियों की सलाह के अनुसार आवश्यक जैव सुरक्षा, पृथक्करण, आवागमन नियंत्रण, शव निपटान और कीटाणुशोधन उपाय लागू करने का भी अनुरोध किया।

सांसद ने यह निर्धारित करने के लिए लगातार निगरानी की मांग की कि क्या बीमारी अन्य गांवों या मवेशियों और बकरियों जैसी अन्य पशुधन प्रजातियों में भी फैल रही है। उन्होंने सत्यापित मौतों और नुकसान के आकलन के आधार पर लागू नियमों और योजनाओं के तहत प्रभावित जनजातीय परिवारों को उचित मुआवजा अथवा अनुग्रह सहायता देने की मांग की।

रे ने यह भी अनुरोध किया कि बीमारी की जांच और नियंत्रण उपायों में कथित देरी के पीछे की परिस्थितियों की जांच की जाए और यदि किसी प्रशासनिक या तकनीकी लापरवाही की पुष्टि होती है तो जिम्मेदारी तय की जाए।

मामले को अत्यंत जरूरी बताते हुए रे ने कहा कि बीमारी के कारण की पहचान करने और उचित रोकथाम उपाय लागू करने में किसी भी प्रकार की देरी से पशुओं की और अधिक मौतें तथा जनजातीय आबादी पर अधिक आर्थिक कठिनाई आ सकती है। उन्होंने मामले की व्यक्तिगत निगरानी और वैज्ञानिक जांच, बीमारी की रोकथाम तथा प्रभावित परिवारों को राहत देने के लिए तत्काल निर्देश जारी करने का अनुरोध किया।

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