कैंपबेल बे पंचायत समिति के प्रमुख ई. एस. राजेश ने पोर्ट ब्लेयर में मीडिया कर्मियों को संबोधित करते हुए। 
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कैंपबेल बे में जमीन अधिग्रहण पर बेहतर मुआवजे की मांग

स्थानीय समस्याओं पर उपराज्यपाल से विस्तारपूर्वक हुई चर्चा

SANJIB KUMAR ROY

सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजय पुरम --

कैंपबेल बे में प्रस्तावित ग्रेट निकोबार आइलैंड परियोजना के तहत होने वाले भूमि अधिग्रहण को लेकर स्थानीय किसानों, पूर्व सैनिक बसने वालों और उनके आश्रितों के हितों की रक्षा तथा बेहतर मुआवजा और पुनर्वास पैकेज की मांग उठाई गई है। पंचायत समिति, कैंपबेल बे के प्रमुख ई. एस. राजेश ने कहा कि परियोजना का वे स्वागत करते हैं, लेकिन विकास के नाम पर स्थानीय लोगों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण के साथ-साथ कैंपबेल बे की लंबे समय से चली आ रही परिवहन, एलपीजी, स्वास्थ्य, बिजली, आवास, द्वीप कार्ड और पंचायत विकास से जुड़ी समस्याओं का भी समाधान आवश्यक है।

कैंपबेल बे पंचायत समिति के प्रमुख ई. एस. राजेश ने पोर्ट ब्लेयर में मीडिया कर्मियों को संबोधित करते हुए कहा कि जीएनए परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण को लेकर बनी समिति के सदस्यों के साथ उन्होंने उपराज्यपाल डॉ. दिनेश शर्मा से मुलाकात की और स्थानीय लोगों की समस्याओं तथा मांगों को विस्तार से उनके समक्ष रखा। उन्होंने कहा कि कैंपबेल बे में प्रस्तावित विश्वस्तरीय विकास परियोजना को लेकर स्थानीय लोगों में खुशी है, लेकिन जिन किसानों और पूर्व सैनिक बसने वालों की पूरी जमीन अधिग्रहित होने वाली है, उनके भविष्य की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

राजेश ने कहा कि वर्तमान में भूमि अधिग्रहण के लिए निर्धारित सर्किल दर स्थानीय लोगों के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय है। उन्होंने बताया कि कैंपबेल बे में सर्किल दर बेहद कम है, जबकि जिस क्षेत्र में परियोजना प्रस्तावित है, वहां भविष्य में बड़े पैमाने पर व्यावसायिक और विश्वस्तरीय विकास होने वाला है। ऐसे में मौजूदा दर के आधार पर मिलने वाला मुआवजा स्थानीय किसानों और पूर्व सैनिक बसने वालों के लिए पर्याप्त नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि शास्त्रीनगर और गांधी नगर के किसानों की बड़ी चिंता यह है कि उनकी पूरी जमीन अधिग्रहित होने की स्थिति में उनके पास आजीविका का आधार ही नहीं बचेगा। उन्होंने कहा कि कई पूर्व सैनिक बसने वाले परिवारों की तीसरी और चौथी पीढ़ी कैंपबेल बे में रह रही है और उनका पूरा अस्तित्व उस जमीन से जुड़ा है। इसलिए भूमि अधिग्रहण से पहले उचित मुआवजा, पर्याप्त पुनर्वास और पुनर्स्थापन पैकेज तय किया जाना जरूरी है।

राजेश ने कहा कि उन्होंने उपराज्यपाल से सर्किल दर को संशोधित करने और स्थानीय लोगों के लिए बेहतर मुआवजा पैकेज तैयार करने का आग्रह किया है। उन्होंने 18 वर्ष से अधिक आयु वाले पूर्व सैनिक बसने वालों और किसानों के आश्रितों के मुद्दे को भी उठाया। उनके अनुसार, अधिनियम के तहत अलग परिवार के रूप में माने जाने वाले 18 वर्ष से अधिक आयु के आश्रितों को भी विस्थापन और पुनर्वास से संबंधित उपलब्ध सुविधाओं और प्रावधानों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने बताया कि उपराज्यपाल ने उनकी बातों को गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि परियोजना के लिए विस्थापित होने वाले किसी भी व्यक्ति के साथ अन्याय नहीं किया जाएगा। राजेश के अनुसार, उपराज्यपाल ने कहा कि विस्थापन और पुनर्वास की प्रक्रिया लोगों की नाराजगी के साथ नहीं, बल्कि संतोषजनक पैकेज के साथ की जाएगी। उन्होंने बताया कि उपराज्यपाल ने यह भी कहा कि वे हाल ही में पदभार संभालने के कारण अभी पूरे विषय को समझ रहे हैं और अधिकारियों के साथ चर्चा कर किसानों तथा पूर्व सैनिक बसने वालों के हित में बेहतर समाधान तलाशेंगे।

राजेश ने कहा कि कैंपबेल बे के लोग जीएनए परियोजना के खिलाफ नहीं हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के लोग वर्षों से इस तरह की बड़ी विकास परियोजना का इंतजार कर रहे थे और केंद्र सरकार द्वारा इसे जमीन पर उतारने की पहल का स्वागत करते हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि जिस जमीन और क्षेत्र के लोगों ने वर्षों तक कठिन परिस्थितियों में जीवन बिताया है, उनके पुनर्वास के समय पर्याप्त जमीन, आवास और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि कुछ वर्ष पहले तक कैंपबेल बे में बिजली, परिवहन, शिक्षा और चिकित्सा जैसी बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी थी। ऐसे कठिन दौर से गुजरकर स्थानीय लोग आज उस स्थिति में पहुंचे हैं, जहां उनके क्षेत्र में बड़ा विकास होने जा रहा है। इसलिए पुनर्वास ऐसा होना चाहिए, जिससे स्थानीय परिवारों को अपने भविष्य को लेकर असुरक्षा महसूस न हो।

राजेश ने सुनामी के बाद बनाए गए स्थायी आश्रय गृहों का मालिकाना हक अब तक लाभार्थियों को नहीं मिलने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि करीब 20 वर्ष बीत जाने के बावजूद कई स्थायी आश्रय गृहों का मालिकाना हक मूल लाभार्थियों या उनके कानूनी उत्तराधिकारियों को नहीं मिला है। जिन लोगों के नाम पर ये घर दिए गए थे, उनमें से कई की मृत्यु हो चुकी है और उनके बच्चे या अगली पीढ़ी वहां रह रही है।

उन्होंने कहा कि बिजली कनेक्शन और अन्य सरकारी प्रक्रियाओं में भी इस वजह से लोगों को परेशानी होती है, क्योंकि रिकॉर्ड में घर के मूल मालिक का नाम दर्ज है, जबकि वह व्यक्ति अब जीवित नहीं है। उन्होंने उपराज्यपाल से स्थायी आश्रय गृहों और उनसे संबंधित भूमि का मालिकाना हक कानूनी उत्तराधिकारियों को देने का आग्रह किया, ताकि सुनामी प्रभावित परिवार वास्तव में उस सरकारी सहायता का लाभ उठा सकें जो उन्हें दी गई थी।

कैंपबेल बे में एलपीजी की समस्या का उल्लेख करते हुए राजेश ने कहा कि पिछले महीनों में लोगों को लंबे समय तक एलपीजी की कमी का सामना करना पड़ा। उन्होंने मांग की कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने और वहां पर्याप्त बफर स्टॉक की व्यवस्था की जाए, ताकि जरूरत पड़ने पर लोगों को तुरंत गैस उपलब्ध हो सके।

उन्होंने निकोबार समूह के द्वीपों के लिए सरकारी स्तर पर एक समर्पित मालवाहक जहाज की व्यवस्था करने की मांग भी रखी। उन्होंने कहा कि डीजल, पेट्रोल और एलपीजी जैसी आवश्यक वस्तुओं के लिए दूरदराज के द्वीपों को निजी क्षेत्र के जहाजों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। प्रशासन के पास अपना ऐसा जहाज होना चाहिए, जो समय-समय पर कैंपबेल बे के साथ-साथ कच्छल, कमोर्टा, चौरा और तरसा जैसे द्वीपों तक आवश्यक सामग्री पहुंचा सके।

राजेश ने 2002 में हुए आइलैंडर कार्ड सर्वे का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि उस समय मौजूद लोगों को आइलैंडर कार्ड मिला, लेकिन बाद में उनके आश्रितों को कार्ड उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी। उन्होंने कैंपबेल बे में स्मार्ट आइलैंड कार्ड जारी करने तथा उस समय छूट गए लोगों के लिए दोबारा सर्वे कर उन्हें शामिल करने की मांग की।

उन्होंने दक्षिणी समूह के द्वीपों में परिवहन की समस्या का उल्लेख करते हुए कहा कि हेलीकॉप्टर की क्षमता सीमित होने के कारण स्थानीय लोगों को परेशानी होती है। जीएनए परियोजना से जुड़े अधिकारियों और अन्य हितधारकों की आवाजाही बढ़ने पर स्थानीय लोगों के लिए सीट उपलब्ध होना और कठिन हो जाता है। उन्होंने हेलीकॉप्टर सेवा की आवृत्ति बढ़ाने तथा उड़ान योजना को तत्काल अंडमान में लागू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि कैंपबेल बे और निकोबार में आवश्यक टर्मिनल सुविधाएं पहले से उपलब्ध हैं और इससे स्थानीय लोगों की हवाई परिवहन समस्या काफी हद तक दूर की जा सकती है।

राजेश ने 2022 तक बाहरी द्वीपों से संदर्भित मरीजों को नि:शुल्क हेलीकॉप्टर के माध्यम से पोर्ट ब्लेयर स्थित जी.बी. पंत अस्पताल तक पहुंचाने की व्यवस्था फिर से शुरू करने की मांग भी रखी। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवार हेलीकॉप्टर का किराया वहन नहीं कर पाते, जिसके कारण गंभीर बीमारी के बावजूद कई मरीज समय पर उपचार के लिए श्री विजय पुरम नहीं पहुंच पाते।

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