दिल्ली | इंद्राणी
गणतंत्र दिवस पर दिल्ली के कर्तव्य पथ पर पश्चिम बंगाल की झांकी में “भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में बंगाल और बंगालियों के योगदान” को भव्य रूप से प्रस्तुत किया गया। बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के रचित ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर पश्चिम बंगाल सरकार ने बंगाल के स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को इस झांकी का मुख्य विषय बनाया।
झांकी की शुरुआत आनंदमठ लिखते हुए साहित्य सम्राट बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की विशाल प्रतिमा से हुई। उनके साथ रवींद्रनाथ टैगोर, नेताजी सुभाषचंद्र बोस, खुदीराम बोस, मातंगिनी हाजरा सहित कई महान स्वतंत्रता सेनानियों की प्रतिमाएं प्रदर्शित की गईं। हाल के दिनों में बंकिमचंद्र को लेकर चले विवाद के बीच इस झांकी को राजनीतिक हलकों में केंद्र की भाजपा सरकार को बंगाल की “मौन प्रतिक्रिया” के रूप में देखा जा रहा है।
इस संदर्भ में तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर राय ने कहा;
“बंगाल का मंत्र ‘वंदे मातरम्’ एक समय पूरे देश में स्वतंत्रता संग्राम की ज्वाला प्रज्वलित करने वाला था। उसी विषय को थीम बनाकर जब हमने झांकी तैयार की, तो उस पर केंद्र सरकार ने कई आपत्तियां जताईं। पांच दौर की बैठकों और अनेक बदलावों के बाद अंततः झांकी को मंजूरी मिली। मेरा सवाल है कि क्या मौजूदा केंद्र सरकार को यह भी पता है कि स्वतंत्रता संग्राम में ‘वंदे मातरम्’ की क्या भूमिका थी?
हो सकता है कि उस दौर में हर कोई स्वतंत्रता आंदोलन में कूद नहीं पाया हो, लेकिन हर देशवासी ने ‘वंदे मातरम्’ को अपने दिल में स्थान दिया था। इस एक शब्द का प्रभाव इतना गहरा था कि ब्रिटिश सरकार इससे भयभीत हो गई और उसे प्रतिबंधित करने पर मजबूर होना पड़ा। 1943 में ‘हरिजन’ पत्रिका में महात्मा गांधी ने इसका उल्लेख करते हुए कहा था कि ‘वंदे मातरम्’ का प्रत्येक छंद देशवासियों को स्वतंत्रता संग्राम के लिए प्रेरित कर रहा है।
ऐसे विषय पर आपत्ति जताने वाली केंद्र सरकार क्या वास्तव में उन स्वतंत्रता सेनानियों का सम्मान करती है, जिन्होंने ‘वंदे मातरम्’ का उच्चारण करते हुए आत्मबलिदान दिया—इस पर मुझे संदेह है। और केवल एक सांसद के रूप में ही नहीं, बल्कि देश के एक वरिष्ठ नागरिक के रूप में भी केंद्र सरकार की इस दोहरी नीति और अहंकार को देखकर मैं स्तब्ध हूं।”
झांकी में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की प्रतिमा सबसे आगे थी, उनके पीछे रवींद्रनाथ टैगोर और हाथ में राष्ट्रीय ध्वज लिए मातंगिनी हाजरा दिखाई दीं। नेताजी सुभाषचंद्र बोस की प्रसिद्ध घोड़े पर सवार प्रतिमा, खुदीराम बोस की फांसी के मंच पर दृढ़ मुद्रा, देशबंधु चित्तरंजन दास, ईश्वरचंद्र विद्यासागर, स्वामी विवेकानंद, अरविंद घोष, भगिनी निवेदिता, मास्टरदा सूर्य सेन, काजी नजरुल इस्लाम, प्रीतिलता वाड्डेदार और अन्य क्रांतिकारियों की झलक भी झांकी में शामिल थी। साथ ही ऐतिहासिक अलीपुर जेल को भी दर्शाया गया।
इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड का समग्र विषय “स्वतंत्रता का मंत्र—वंदे मातरम्” था, जबकि बंगाल की झांकी का विषय “भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में बंगाल की भूमिका” रहा। कुछ महीनों बाद होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले इसे बंगाल की अस्मिता को उभारने वाला राजनीतिक संदेश भी माना जा रहा है।