अंजलि भाटिया
नई दिल्लीः कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि सरकार ने अपने पूरे “ट्रोल आर्मी” को शंकराचार्य के खिलाफ सक्रिय कर दिया है, क्योंकि वे सत्ता के सामने झुकने को तैयार नहीं हैं। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि शंकराचार्य का अपराध सिर्फ इतना है कि वे सरकार की प्रशंसा नहीं करते और जनहित से जुड़े सवाल उठाने का साहस रखते हैं।
खेड़ा ने कहा, “संत राजा के सामने नहीं झुकते, बल्कि राजा संतों के सामने झुकते हैं।” उन्होंने प्रधानमंत्री से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो सरकार खुद को ‘सनातनी’ कहने का नैतिक अधिकार खो देगी और उसे ‘धनातनी’ कहा जाएगा। कांग्रेस का आरोप है कि सत्ता के अहंकार में सरकार धर्म और परंपराओं का भी राजनीतिक उपयोग कर रही है।
कांग्रेस नेता ने शंकराचार्य द्वारा उठाए गए सवालों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अधूरे मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा पर सवाल खड़े किए, महाकुंभ में अव्यवस्थाओं को उजागर किया और कोविड काल में गंगा में बहते शवों जैसे संवेदनशील मुद्दों को सामने रखा। यही कारण है कि सरकार और उससे जुड़े संगठन उन्हें निशाने पर ले रहे हैं।
खेड़ा ने सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जिस सरकार ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को Z+ सुरक्षा दी है, उसी सरकार ने शंकराचार्य को ‘शाही स्नान’ से रोक दिया। उन्होंने ओडिशा और उदयपुर की घटनाओं का हवाला देते हुए भाजपा पर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाया।
कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा आस्था के नाम पर लोगों को “भक्त” बनाकर उन्हें गुमराह करती है और यही उसकी राजनीति का आधार है। वहीं, प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, मौनी अमावस्या के अवसर पर माघ मेले में संगम पर 4.52 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान किया, जिसे सरकार अपनी व्यवस्था की सफलता के रूप में पेश कर रही है।