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विश्व हिंदी दिवस पर भारत–जापान मैत्री का सशक्त स्वर

पद्मश्री प्रोफेसर तोमियो मिज़ोकामी: हिंदी सहित 6 भारतीय भाषाओं के जापान में आजीवन संवाहक

नयी दिल्ली, सन्मार्ग सम्वाददाता

विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर भारत–जापान सांस्कृतिक संबंधों को नई ऊँचाई देने वाले पद्मश्री सम्मानित प्रोफेसर तोमियो मिज़ोकामी एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। 84 वर्षीय जापानी विद्वान, भाषाविद् और ओसाका विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एमेरिटस प्रोफेसर मिज़ोकामी को भारत और जापान के बीच सबसे प्रभावशाली सांस्कृतिक दूतों में गिना जाता है।

हिंदी के साथ-साथ छह भारतीय भाषाओं के अध्ययन, अध्यापन और प्रचार-प्रसार में दशकों तक समर्पित रहने वाले प्रोफेसर मिज़ोकामी को भारत सरकार ने वर्ष 2018 में पद्मश्री सम्मान से अलंकृत किया था। यह सम्मान उन्हें राष्ट्रपति भवन में आयोजित सिविल इन्वेस्टिचर समारोह में भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किया गया।

जापान में हिंदी, पंजाबी सहित अन्य भारतीय भाषाओं को अकादमिक पहचान दिलाने में उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही है। उनके प्रयासों से जापानी विश्वविद्यालयों में भारतीय भाषाओं के अध्ययन को न केवल स्थान मिला, बल्कि भारत की सांस्कृतिक समझ भी गहरी हुई।

आईसीसीआर (Indian Council for Cultural Relations) के विशेष आमंत्रण पर प्रोफेसर मिज़ोकामी इन दिनों भारत यात्रा पर हैं। वे युवा संवाद और सांस्कृतिक इंटरैक्शन कार्यक्रमों के तहत विभिन्न शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक मंचों पर भाग ले रहे हैं। प्रोफेसर मिज़ोकामी 14 जनवरी 2026 तक भारत में प्रवास करेंगे, जहाँ वे छात्रों, शोधकर्ताओं और भाषा प्रेमियों से संवाद करेंगे।

विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर उनकी उपस्थिति यह संदेश देती है कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि देशों और संस्कृतियों को जोड़ने वाला सेतु है—और प्रोफेसर तोमियो मिज़ोकामी इस सेतु के सबसे सशक्त स्तंभों में से एक हैं।

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