सन्मार्ग संवाददाता
श्री विजयपुरम :अंडमान एवं निकोबार आशा कर्मचारी संघ ने आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय में 3,000 रुपये की बढ़ोतरी होने का स्वागत करते हुए केंद्र सरकार और प्रशासन का आभार व्यक्त किया है। संघ ने कहा कि लंबे समय से किए जा रहे पत्राचार, धरना-प्रदर्शन और विभिन्न स्तरों पर अधिकारियों से मुलाकातों के बाद यह बढ़ोतरी संभव हुई है। हालांकि, संघ ने स्पष्ट किया कि आशा कार्यकर्ताओं की समस्याओं का समाधान केवल मानदेय बढ़ाने तक सीमित नहीं है और उन्हें नियमित सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने तथा सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की मांग अभी भी जारी रहेगी। श्री विजयपुरम में आयोजित प्रेस वार्ता में अंडमान एवं निकोबार आशा कर्मचारी संघ की महासचिव सोनी डोको ने कहा कि संघ वर्ष 2021 से आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय में बढ़ोतरी की मांग को लेकर लगातार प्रयास कर रहा है। उन्होंने बताया कि आशा कार्यकर्ताओं को शुरुआती दौर में बिना किसी निश्चित मानदेय के प्रोत्साहन आधारित व्यवस्था के तहत काम करना पड़ता था। भारत में वर्ष 2005 में आशा योजना शुरू की गई थी, जबकि अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में अक्टूबर-नवंबर 2008 से आशा कार्यकर्ताओं को इस व्यवस्था में जोड़ा गया। उन्होंने कहा कि शुरुआती समय की तुलना में वर्तमान में आशा कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारियां काफी बढ़ गई हैं। अब उन्हें नियमित रूप से उपकेंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और अपने-अपने कार्यक्षेत्र में जाना पड़ता है। सुबह करीब साढ़े आठ से नौ बजे के बीच घर से निकलकर दोपहर तक स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न कार्यों को पूरा करने के अलावा उन्हें क्षेत्रीय स्तर पर सर्वेक्षण, रिपोर्ट तैयार करने और सरकार की विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी पड़ती है। सोनी डोको ने कहा कि वर्ष 2021 से संगठन ने मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर लगातार पत्राचार किया और धरना-प्रदर्शन किए। वर्ष 2024 में अंडमान एवं निकोबार प्रदेश में धरना देने के बाद देशव्यापी स्तर पर भी कई बार आंदोलन किए गए। उन्होंने बताया कि इस वर्ष 9 जुलाई को भी देशव्यापी धरना आयोजित किया गया था, जिसमें आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय को बढ़ाकर 10,000 से 15,000 रुपये करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई थी। उन्होंने कहा कि इन लगातार प्रयासों के बाद आशा कार्यकर्ताओं के लिए 3,000 रुपये की अतिरिक्त बढ़ोतरी का आदेश प्राप्त हुआ है। उनके अनुसार, यह बढ़ोतरी अप्रैल से प्रभावी होने की जानकारी दी गई है और इसका आदेश भी संगठन के पास उपलब्ध है। पहले आशा कार्यकर्ताओं को केंद्र की ओर से 2,000 रुपये और केंद्र शासित प्रदेश के हिस्से से 500 रुपये मिलते थे। 3,000 रुपये की नई बढ़ोतरी के बाद उनका कुल मानदेय 5,000 रुपये हो गया है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि बढ़ी हुई राशि का भुगतान अभी तक उनके खातों में नहीं हुआ है। सोनी डोको ने इस उपलब्धि के लिए संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ संगठन के पदाधिकारियों और अखिल भारतीय आशा कर्मचारी महासंघ के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि संगठन ने सांसद बिष्णु पद रे, मुख्य सचिव, उपायुक्त, मिशन निदेशक, स्वास्थ्य सेवा निदेशक तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अधिकारियों से भी समय-समय पर मुलाकात कर आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय में बढ़ोतरी का मुद्दा उठाया था। प्रेस वार्ता में संगठन के प्रभारी अनूप कुमार दत्ता ने कहा कि 3,000 रुपये की बढ़ोतरी निश्चित रूप से आशा कार्यकर्ताओं के लिए खुशी की खबर है, लेकिन उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति को देखते हुए यह राशि अभी भी पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले केंद्र का हिस्सा 2,000 रुपये और केंद्र शासित प्रदेश का हिस्सा 500 रुपये होने के कारण कुल 2,500 रुपये में परिवार चलाना बेहद कठिन था। अब बढ़ोतरी के बाद भी आशा कार्यकर्ताओं को न्यूनतम मजदूरी के दायरे में नहीं लाया गया है। अनूप कुमार दत्ता ने केंद्र सरकार से मांग की कि आशा कार्यकर्ताओं को सरकार की नियमित योजना व्यवस्था में शामिल करते हुए स्वयंसेवी कार्यकर्ता की पहचान से बाहर किया जाए और उन्हें सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। उन्होंने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं को सम्मानजनक मानदेय, सामाजिक सुरक्षा और उनके काम के अनुरूप अधिकार मिलना जरूरी है।