पेज 2 सब-लीड विश्व पर्यटन दिवस पर सिलीगुड़ी में 42 दलों की शोभायात्रा; मंत्री शंकर घोष बोले- उत्तर बंगाल की पहाड़, डुआर्स, जंगल और लोकसंस्कृति को बनाएंगे पर्यटन की नई ताकत बॉक्स पर्यटन बजट के इस्तेमाल को लेकर मंत्री ने उठाए सवाल 42 दलों ने शोभायात्रा में लिया हिस्सा, पुलिस बैंड से लायन डांस तक आकर्षण एआई और डिजिटल तकनीक से पर्यटन सेवाओं को आधुनिक बनाने की तैयारी स्थानीय संस्कृति और पर्यटन को जोड़कर रोजगार बढ़ाने पर जोर सन्मार्ग संवाददाता, सिलीगुड़ी : उत्तर बंगाल में पर्यटन की संभावनाएं अपार हैं, लेकिन अब तक उनका पूरा फायदा नहीं उठाया जा सका। विश्व पर्यटन दिवस पर शनिवार को सिलीगुड़ी में आयोजित कार्यक्रम में पर्यटन के इसी अधूरे सफर और आने वाले बदलावों की तस्वीर सामने आई। पर्यटन मंत्री शंकर घोष ने पिछले 15 वर्षों में पर्यटन विभाग के बजट खर्च पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि कुल आवंटित राशि का 20 प्रतिशत भी पर्यटन विकास पर खर्च नहीं किया जा सका। उन्होंने खर्च की गई राशि को लेकर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप भी लगाए। विश्व पर्यटन दिवस और ईश्वरचंद्र विद्यासागर की जयंती के अवसर पर पश्चिम बंगाल पर्यटन विभाग और फेडरेशन ऑफ बंगाल होटलियर्स की ओर से दो दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया गया है। शनिवार को सिलीगुड़ी कॉलेज मैदान से निकली भव्य शोभायात्रा के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। दीप प्रज्ज्वलन के बाद निकली शोभायात्रा में स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों, सांस्कृतिक एवं नृत्य दलों, प्रशासन और पर्यटन उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों समेत 42 दलों ने हिस्सा लिया। शोभायात्रा में पुलिस बैंड, टोटो, घोड़ागाड़ी, पालकी, ढाक और लायन डांस आकर्षण का केंद्र रहे। विशेष रूप से सक्षम लोगों की भागीदारी ने भी कार्यक्रम को खास बनाया। सड़क पर रंगारंग प्रस्तुति के बीच ‘Explore West Bengal’ का संदेश दिया गया। पुराने खर्च पर सवाल, आगे की तैयारी कार्यक्रम के दौरान पर्यटन मंत्री ने कहा कि पिछले डेढ़ दशक में पर्यटन को लेकर कई दावे और योजनाएं सामने आईं, लेकिन पर्यटन विकास के लिए आवंटित राशि का अपेक्षित इस्तेमाल नहीं हुआ। उनके अनुसार, 15 वर्षों में विभाग कुल बजट का 20 प्रतिशत तक भी खर्च नहीं कर सका। उन्होंने खर्च हुई राशि में भी अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। मंत्री ने कहा कि अब राज्य के पर्यटन क्षेत्र को नए तरीके से विकसित करने की जरूरत है। इसके लिए नए पर्यटन स्थलों को विकसित करने के साथ मौजूदा पर्यटन केंद्रों का बुनियादी ढांचा मजबूत किया जाएगा। स्थानीय संस्कृति, परंपरा और विरासत को पर्यटन से जोड़ने पर विशेष जोर रहेगा, ताकि पर्यटकों की संख्या बढ़ने के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आय के अवसर भी बढ़ें। पहाड़ से जंगल तक, नई पहचान की तैयारी उत्तर बंगाल के पहाड़, डुआर्स, चाय बागान, जंगल, नदियां और लोकसंस्कृति पर्यटन विकास के केंद्र में रहेंगे। इसके साथ ही पर्यटन विस्तार और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया गया। यानी विकास के साथ प्रकृति को बचाने की चुनौती भी योजना का अहम हिस्सा होगी। AI से बदलेगा पर्यटक का अनुभव इस वर्ष विश्व पर्यटन दिवस की अंतरराष्ट्रीय थीम ‘Digital Agenda and Artificial Intelligence to Redesign Tourism’ है। इसी के अनुरूप पर्यटन सेवाओं में एआई और डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है। उद्देश्य पर्यटन संबंधी जानकारी और सेवाओं को अधिक आधुनिक, आसान और नई पीढ़ी के अनुकूल बनाना है। कार्यक्रम में डाबग्राम-फूलबाड़ी की विधायक शिखा चटर्जी, ट्रैफिक डीसीपी काजी शम्सुद्दीन अहमद समेत प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि, शिक्षण संस्थानों और पर्यटन उद्योग से जुड़े प्रतिनिधि मौजूद रहे। सिलीगुड़ी के इस आयोजन में एक तरफ पर्यटन की रंगीन तस्वीर दिखी, तो दूसरी तरफ पुराने बजट खर्च पर उठे सवालों के बीच भविष्य की नई रणनीति का संकेत भी मिला।