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1449 युवाओं ने पूरा किया डिजिटल कौशल प्रशिक्षण, रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर

KD Parth

मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत प्रमाणपत्र वितरित

20 आईटीआई और सात निजी कंप्यूटर केंद्रों में चल रहा कार्यक्रम

अगरतला :

त्रिपुरा में युवाओं को डिजिटल कौशल से लैस कर उनकी रोजगार क्षमता बढ़ाने की दिशा में राज्य सरकार की पहल को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। डिजिटल एम्प्लॉयबिलिटी एन्हांसमेंट प्रोग्राम (डीएसडी-डीप) के पहले चरण में राज्य के विभिन्न हिस्सों से 1449 युवक-युवतियों ने प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत इन प्रशिक्षुओं को बुधवार को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। कार्यक्रम का आयोजन अगरतला स्थित कौशल विकास निदेशालय के सम्मेलन कक्ष में किया गया। इस पहल का उद्देश्य रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप डिजिटल कौशल प्रदान करना और तकनीक आधारित रोजगार बाजार में उनकी संभावनाओं को बेहतर बनाना है। सरकार का मानना है कि डिजिटल तकनीक का उपयोग तेजी से बढ़ने के साथ विभिन्न क्षेत्रों में कंप्यूटर संचालन, डेटा प्रबंधन और डिजिटल सेवाओं से जुड़ी दक्षताओं की मांग भी बढ़ रही है। ऐसे में युवाओं को व्यावहारिक प्रशिक्षण देना उनके लिए रोजगार के नए रास्ते खोल सकता है। पहले चरण में 2000 प्रशिक्षुओं का लक्ष्यकौशल विकास निदेशालय से मिली जानकारी के अनुसार, डीएसडी-डीप का पहला चरण एमकेसीएल के माध्यम से लागू किया जा रहा है। इसके तहत पूरे राज्य में कुल 2000 प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्रशिक्षण की व्यवस्था 20 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) और सात निजी कंप्यूटर केंद्रों के माध्यम से की गई है, ताकि अलग-अलग क्षेत्रों के युवाओं को इसका लाभ मिल सके। कार्यक्रम के तहत उपलब्ध सभी 2000 सीटें पहले ही भर चुकी हैं। इससे राज्य में डिजिटल शिक्षा और रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण के प्रति युवाओं की बढ़ती रुचि का पता चलता है। अब तक 1449 प्रशिक्षु पाठ्यक्रम पूरा कर प्रमाणपत्र प्राप्त कर चुके हैं। इस प्रकार कुल निर्धारित सीटों में से लगभग 72.5 प्रतिशत प्रशिक्षुओं ने प्रशिक्षण पूरा कर लिया है। राज्य सरकार की इस पहल का उद्देश्य प्रशिक्षण सुविधाओं को युवाओं के निवास के नजदीक उपलब्ध कराना है, जिससे उन्हें डिजिटल कौशल हासिल करने के लिए दूर-दराज के संस्थानों पर निर्भर न रहना पड़े। 120 घंटे के पाठ्यक्रम में व्यावहारिक प्रशिक्षणडीएसडी-डीप के तहत प्रशिक्षण कार्यक्रम को इस तरह तैयार किया गया है कि प्रतिभागी आधुनिक कार्यस्थलों में इस्तेमाल होने वाले डिजिटल उपकरणों और तकनीकों की व्यावहारिक जानकारी हासिल कर सकें। इसके लिए कुल 120 घंटे का संरचित प्रशिक्षण निर्धारित किया गया है। पाठ्यक्रम में माइक्रोसॉफ्ट एक्सेल के माध्यम से डेटा प्रबंधन, डीप-आईटीएस, मोबाइल एप्लिकेशन विकास, डेस्कटॉप पब्लिशिंग तथा बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और बीमा यानी बीएफएसआई से जुड़े विषय शामिल हैं। इन विषयों के माध्यम से युवाओं को स्प्रेडशीट संचालन, दस्तावेज तैयार करने, डिजिटल सामग्री के प्रकाशन और वित्तीय सेवाओं से जुड़ी तकनीकों की जानकारी दी जा रही है। प्रशिक्षण का जोर केवल सैद्धांतिक शिक्षा पर नहीं, बल्कि व्यावहारिक दक्षता विकसित करने पर है, ताकि प्रशिक्षु कार्यस्थलों पर डिजिटल उपकरणों का प्रभावी इस्तेमाल कर सकें। निजी और सरकारी क्षेत्र में रोजगार की संभावनाएंअधिकारियों के अनुसार, कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य युवाओं के कौशल को उद्योगों की मौजूदा जरूरतों के अनुरूप बनाना है। डिजिटल दक्षता हासिल करने वाले युवाओं के लिए कार्यालयों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और सेवा क्षेत्र से जुड़ी संस्थाओं में रोजगार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। कंप्यूटर और स्मार्टफोन का इस्तेमाल अब लगभग सभी प्रमुख आर्थिक गतिविधियों का हिस्सा बन चुका है। बैंकिंग, व्यापार, प्रशासनिक कामकाज, डेटा प्रबंधन और ग्राहक सेवाओं में डिजिटल तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में डिजिटल कौशल रखने वाले उम्मीदवारों को विभिन्न प्रकार की नौकरियों के लिए तैयार करने में इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम मददगार हो सकते हैं। इस कार्यक्रम से प्रशिक्षित युवाओं को त्रिपुरा के भीतर ही नहीं, बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी रोजगार तलाशने के लिए उपयोगी कौशल मिल सकता है। हालांकि, प्रमाणपत्र प्राप्त करना अपने आप में नौकरी की गारंटी नहीं है। रोजगार के वास्तविक अवसर उम्मीदवारों की दक्षता, उपलब्ध रिक्तियों और नियोक्ताओं की आवश्यकताओं पर निर्भर करेंगे। तकनीकी शिक्षा के साथ डिजिटल कौशल जोड़ने की तैयारीपहले चरण में मिली प्रतिक्रिया के बाद कौशल विकास निदेशालय डीएसडी-डीप के दूसरे चरण को शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए पाठ्यक्रम को नए सिरे से व्यवस्थित करने पर काम किया जा रहा है, ताकि आईटीआई के विद्यार्थियों को अधिक लाभ मिल सके। प्रस्तावित बदलावों के तहत डिजिटल कौशल को तकनीकी ट्रेडों के साथ जोड़ने पर जोर दिया जाएगा। इससे विद्यार्थियों को अपने पारंपरिक तकनीकी प्रशिक्षण के साथ आधुनिक डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल करने की दक्षता भी मिल सकेगी। तकनीकी शिक्षा और डिजिटल प्रशिक्षण का एकीकरण विद्यार्थियों को बदलती औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप तैयार करने में सहायक हो सकता है। इससे उनके लिए तकनीकी नौकरियों, कार्यालय आधारित कार्यों और अन्य डिजिटल सेवाओं से जुड़े रोजगार के विकल्प बढ़ाने की संभावनाएं बनेंगी। डिजिटल अर्थव्यवस्था में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने का लक्ष्यकौशल विकास निदेशालय ने प्रशिक्षण पूरा करने वाले सभी युवाओं को बधाई देते हुए उम्मीद जताई कि अर्जित डिजिटल दक्षताएं उन्हें बेहतर करियर बनाने में मदद करेंगी। साथ ही, इन युवाओं से राज्य की उभरती डिजिटल अर्थव्यवस्था में सार्थक योगदान देने की अपेक्षा की गई है। त्रिपुरा में डीएसडी-डीप जैसी पहल डिजिटल कौशल की कमी को दूर करने और युवाओं को रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण है। पहले चरण में सभी सीटों का भर जाना इस बात का संकेत है कि युवा पारंपरिक शिक्षा के साथ व्यावहारिक और तकनीक आधारित प्रशिक्षण में भी रुचि ले रहे हैं। अब कार्यक्रम के दूसरे चरण में पाठ्यक्रम को और उपयोगी बनाने तथा प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को वास्तविक रोजगार अवसरों से जोड़ने पर ध्यान देना महत्वपूर्ण होगा। इससे कौशल विकास की यह पहल राज्य में रोजगार क्षमता, स्वरोजगार और आर्थिक भागीदारी को मजबूत करने में अधिक प्रभावी साबित हो सकती है।
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