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रेल संरक्षा आयुक्त ने जसीडीह बाईपास नई बड़ी लाइन का किया निरीक्षण

देवघर लिंक केबिन–कुमरबाद रोहिणी के बीच 4.856 किमी रेलखंड यात्री एवं माल यातायात के लिए अधिकृत

Megha

आसनसोल : पूर्वी परिमंडल के रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) श्री गुरु प्रकाश ने 10 सितंबर 2026 को देवघर लिंक केबिन और कुमरबाद रोहिणी के बीच नवनिर्मित जसीडीह बाईपास नई बड़ी लाइन का निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद इस 4.856 किलोमीटर लंबे रेलखंड को 100 किमी प्रति घंटे की खंडीय गति से यात्री एवं माल यातायात के लिए खोलने हेतु अधिकृत किया गया।

निरीक्षण के दौरान पूर्व रेलवे के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (निर्माण) श्री मनोज खान, आसनसोल मंडल के मंडल रेल प्रबंधक श्री संग्रह मौर्य तथा पूर्व रेलवे के अन्य वरिष्ठ अधिकारी और आसनसोल मंडल के संबंधित शाखा अधिकारी उपस्थित थे।

देवघर लिंक केबिन (किमी 3.957) से कुमरबाद रोहिणी (किमी 8.813) तक निर्मित इस रेलखंड का निर्माण 293.67 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। 1676 मिमी बड़ी लाइन वाला यह रेलखंड 25 केवी एसी कर्षण प्रणाली से पूर्णतः विद्युतीकृत है। बाईपास के चालू होने से जसीडीह जंक्शन से होकर गुजरे बिना देवघर और कुमरबाद रोहिणी के बीच सीधा रेल संपर्क उपलब्ध होगा।

निरीक्षण के दौरान सीआरएस ने रेल पथ, रेल पथ संरचना, पुलों, विद्युतीकरण, सिगनलिंग और अन्य संरक्षा व्यवस्थाओं का विस्तृत जायजा लिया। नवनिर्मित रेलखंड की परिचालन तत्परता और संरक्षा मानकों के आकलन के लिए मोटर ट्रॉली से भी निरीक्षण किया गया।

परियोजना के अंतर्गत 12 पुल और दो रोड ओवर ब्रिज (आरओबी) का निर्माण किया गया है। 12 पुलों में 11 लघु आरसीसी बॉक्स पुल तथा एक 18.3 मीटर लंबा प्रमुख कंपोजिट गर्डर पुल शामिल है। रेल पथ में 60 किलोग्राम आर-260 लॉन्ग वेल्डेड रेल (एलडब्ल्यूआर) को पीएससी स्लीपरों पर बिछाया गया है। रेल जोड़ों की फ्लैश-बट वेल्डिंग की गई है तथा निर्धारित मानकों के अनुरूप गिट्टी की व्यवस्था की गई है।

रेलखंड के संरेखण में सात वक्र हैं। इनमें सबसे तीक्ष्ण वक्र की त्रिज्या 375 मीटर है, जबकि अधिकतम ढाल 1 in 180 है। रेल पथ संरचना में व्यापक मृदा कार्य किया गया है। इसमें अधिकतम 21.44 मीटर ऊंचा तटबंध और अधिकतम 21.37 मीटर गहरी कटिंग शामिल है। निर्धारित आरडीएसओ विनिर्देशों के अनुरूप 400 मिमी ब्लैंकेटिंग की व्यवस्था की गई है।

यह रेलखंड इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (ईआई) और मल्टीपल एस्पेक्ट कलर लाइट सिगनलिंग से सुसज्जित है। देवघर लिंक केबिन में ‘बी’ श्रेणी मानक-II सिगनलिंग व्यवस्था तथा कुमरबाद रोहिणी में ‘एसपीएल’ श्रेणी मानक-III सिगनलिंग व्यवस्था है। रेलखंड में 29/E/SPL और 28/T/SPL दो समपार फाटक हैं, जहां आवश्यक संरक्षा प्रावधान किए गए हैं।

जसीडीह जंक्शन पर परिचालन होगा और सुगम

जसीडीह बाईपास का सबसे महत्वपूर्ण परिचालन लाभ यह है कि देवघर जाने वाली ट्रेनों के इंजन को जसीडीह जंक्शन पर दिशा परिवर्तन नहीं करना पड़ेगा। इससे ट्रेनों के परिचालन में लगने वाला अनावश्यक समय कम होगा। साथ ही ईंधन की खपत और क्रू की तैनाती की आवश्यकता में भी कमी आएगी। इससे ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुचारु होगी तथा जसीडीह जंक्शन पर परिचालन संबंधी दबाव और भीड़भाड़ को कम करने में मदद मिलेगी।

देवघर के तीर्थ एवं पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

देवघर एक महत्वपूर्ण तीर्थ एवं पर्यटन केंद्र है। नए रेल संपर्क से देवघर तक रेल पहुंच और बेहतर होगी तथा तीर्थयात्रियों और पर्यटकों की आवाजाही अधिक सुगम होगी। इसके साथ ही माल परिवहन को भी सुविधा मिलेगी, जिससे क्षेत्र में पर्यटन, तीर्थयात्रा और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

जसीडीह बाईपास नई बड़ी लाइन को यात्री एवं माल यातायात के लिए 100 किमी प्रति घंटे की खंडीय गति से अधिकृत किया जाना क्षेत्र में रेल अवसंरचना को मजबूत करने और ट्रेन परिचालन को अधिक प्रभावी एवं सुगम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

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