कोलकाता : यात्री सुरक्षा और रेल संरचनाओं की मजबूती के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करते हुए पूर्व रेलवे ने मालदा मंडल के कहलगांव–भागलपुर–जमालपुर खंड में व्यापक एहतियाती उपाय, गति प्रतिबंध तथा निरंतर निगरानी व्यवस्था लागू की है। गंगा नदी में बाढ़ के उच्च जलस्तर के प्रभाव से निपटते हुए प्रत्येक रेल यात्रा को सुरक्षित बनाए रखने के लिए पूर्व रेलवे की महाप्रबंधक सुश्री गीतिका पांडेय के मार्गदर्शन में समर्पित इंजीनियरिंग टीमों को तैनात किया गया है और कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए गए हैं।
रेल पटरियों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मंडल रेल प्रबंधक, मालदा, श्री मनीष कुमार गुप्ता के सक्रिय निर्देशन में नदी के किनारे बाढ़ से प्रभावित दो प्रमुख समानांतर रेल खंडों की लगातार निगरानी की जा रही है। इनमें कहलगांव–भागलपुर खंड का कहलगांव–साबौर खंड (किमी 276–296) तथा भागलपुर–जमालपुर खंड का सुल्तानगंज–रतनपुर खंड (किमी 335–350) शामिल हैं। वर्तमान में बाढ़ का पानी मुख्यतः बैकवॉटर के रूप में है और इसमें कोई उल्लेखनीय बहाव नहीं देखा गया है। हालांकि, लैलाख ममलखा–साबौर खंड को छोड़कर अन्य स्थानों पर भी कोई महत्वपूर्ण धारा प्रवाह नहीं है। कई पुलों पर जलस्तर खतरे के स्तर को पार कर चुका है। एहतियाती सुरक्षा उपाय के रूप में भारतीय रेलवे ब्रिज मैनुअल के पैरा 706(2) के प्रावधानों का कड़ाई से पालन करते हुए नियंत्रित कॉशन स्पीड प्रतिबंध लागू किए गए हैं। इसके तहत ब्रिज संख्या 130, 135, 144A, 181, 188, 195, 197 और 198 पर 30 किमी प्रति घंटा, जबकि ब्रिज संख्या 145A पर 20 किमी प्रति घंटा की कॉशन लागू है। केंद्रीय जल आयोग के 08 सितंबर 2026 को 06:00 बजे तक के अवलोकन के अनुसार, मुंगेर में गंगा का जलस्तर 40.08 मीटर दर्ज किया गया, जो 39.33 मीटर के खतरे के स्तर से 0.75 मीटर अधिक है। वहीं भागलपुर में जलस्तर 34.60 मीटर रहा, जो 33.68 मीटर के खतरे के स्तर से 0.92 मीटर अधिक है। केंद्रीय जल आयोग के गेज ट्रेंड के अनुसार इलाहाबाद, वाराणसी, बक्सर, पटना और मुंगेर में जलस्तर में गिरावट देखी जा रही है, जबकि बरियारपुर, कल्याणपुर और भागलपुर में जलस्तर अपेक्षाकृत मध्यम गति से बढ़ रहा है। यद्यपि वर्तमान में समग्र स्थिति नियंत्रण में है, फिर भी कई रेलवे पुलों पर बाढ़ का जलस्तर गंभीर बना हुआ है और निरंतर कड़ी निगरानी की आवश्यकता है। निर्बाध सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूर्व रेलवे ने एक सुदृढ़ कार्ययोजना लागू की है। जिन सभी संवेदनशील पुलों पर पानी खतरे के स्तर को पार कर चुका है, वहां स्थायी वॉचमैन द्वारा 24 घंटे, सातों दिन निगरानी की जा रही है। इसके अतिरिक्त, बाढ़ प्रभावित पूरे कहलगांव– जमालपुर खंड में समर्पित पेट्रोलमैन द्वारा पैदल गश्त की जा रही है। स्थल पर जलस्तर की प्रति घंटे रिकॉर्डिंग की जा रही है, जबकि जलस्तर में किसी भी महत्वपूर्ण वृद्धि, जलधारा, स्कॉर(नींव के आसपास मिट्टी/तलछट के कटाव) अथवा किसी अन्य असामान्यता का तत्काल पता लगाने के लिए केंद्रीय जल आयोग से संबंधित आंकड़े हर चार घंटे में एकत्र किए जा रहे हैं।
इसके अलावा, मुख्य पुल इंजीनियर तथा मुख्य इंजीनियर/सामान्य सहित वरिष्ठ अधिकारी भागलपुर में कैंप कर रहे हैं। वे जमीनी स्थिति का प्रत्यक्ष निरीक्षण कर रहे हैं और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित कर रहे हैं। अनुभागीय वरिष्ठ मंडल इंजीनियर, सहायक मंडल इंजीनियर, स्थायी पथ निरीक्षक तथा निर्माण निरीक्षक द्वारा प्रतिदिन ट्रॉली, फुटप्लेट और पैदल निरीक्षण किए जा रहे हैं। इसमें अनिवार्य रात्रिकालीन निरीक्षण भी शामिल हैं। बरियारपुर में मानसून रिजर्व सामग्री, पर्याप्त मानवबल और मशीनरी को आपातकालीन तैनाती के लिए पूरी तरह तैयार रखा गया है। संवेदनशील स्थानों पर बैंक प्रोटेक्शन, सेस चौड़ीकरण तथा बल्ला पाइलिंग जैसे सुरक्षात्मक कार्य पहले ही पूरे किए जा चुके हैं। रेल प्रशासन पूरी तरह तैयार है कि यदि बाढ़ का पानी बेयरिंग लेवल के करीब पहुंचता है अथवा उल्लेखनीय जलधारा/स्कॉर की स्थिति उत्पन्न होती है, तो तत्काल यातायात विनियमन अथवा रेल परिचालन का निलंबन किया जा सके। दीर्घकालिक संरचनात्मक समाधान के रूप में ब्रिज संख्या 195 के री-गर्डरिंग तथा उसे ऊंचा करने के साथ-साथ इसके एप्रोच को भी ऊंचा करने का प्रस्ताव प्रमुख स्थायी सुधारात्मक उपाय के रूप में रखा गया है।
रेल प्रशासन की पूरी तैयारियों के प्रति आम जनता को आश्वस्त करते हुए, पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, श्री शिबराम माझि ने कहा-“हमारे यात्रियों की सुरक्षा, सुविधा और कल्याण पूर्व रेलवे की सर्वोच्च प्राथमिकताएं हैं। यद्यपि वर्तमान में बाढ़ की स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है, फिर भी हमारे इंजीनियरिंग दल और वरिष्ठ अधिकारी पूरे रेलखंड में चौबीसों घंटे सतर्कता बनाए हुए हैं। गति प्रतिबंध से लेकर तटबंधों को मजबूत करने, निरंतर गश्त तथा आपातकालीन संसाधनों की तैनाती तक, हर सुरक्षा उपाय पहले से ही सक्रिय कर दिया गया है, ताकि हमारे यात्री पूरे विश्वास और निश्चिंतता के साथ यात्रा कर सकें।”