हावड़ा में डेंगू का प्रकोप लगातार बढ़ता नजर आ रहा है। जिले में डेंगू के मामलों की संख्या एक सप्ताह में 94 से बढ़कर 115 हो गई है। मामलों में अचानक हुई इस बढ़ोतरी ने स्वास्थ्य विभाग और हावड़ा नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जिला स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के मुताबिक, डेंगू की रोकथाम को लेकर जिला स्वास्थ्य विभाग और हावड़ा नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग के बीच बेहतर समन्वय की कमी सामने आई है। हावड़ा के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी (CMOH) किशलय दत्ता ने नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग के ओएसडी आशुतोष कुंडू पर स्वास्थ्य भवन की ओर से दिए गए निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि कुछ इलाकों में मामलों के बढ़ने के पीछे यह भी एक कारण हो सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पिछले वर्ष की तुलना में संक्रमण का स्तर अभी कम है।
वहीं, स्थानीय लोगों ने कुछ नगर निगम स्वास्थ्य केंद्रों में डेंगू जांच किट और दवाओं की कमी का आरोप लगाया है। यह भी शिकायत सामने आई है कि हर बुखार के मरीज की डेंगू जांच नहीं की जा रही। हालांकि, जिला स्वास्थ्य अधिकारी ने किट और दवाओं की कमी से इनकार करते हुए कहा कि स्वास्थ्य भवन जरूरत के अनुसार आपूर्ति कर रहा है।
नगर निगम के एक वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी ने इन आरोपों को गलत बताया, लेकिन विभाग में कर्मचारियों की कमी, वेक्टर-बोर्न डिजीज और वेक्टर कंट्रोल मच्छरकर्मी दल के काम में कमी, कुछ इलाकों में आंकड़ों के संग्रह की समस्या और नियमित रूप से लार्वीसाइड का छिड़काव नहीं होने की बात स्वीकार की।
डेंगू प्रभावित इलाकों में नियंत्रण अभियान तेज करने के लिए हावड़ा नगर निगम अब ड्रोन के जरिए लार्वीसाइड का छिड़काव करने की योजना बना रहा है। जिला प्रशासन ने भी नगर निगम और जिला परिषद को सरकारी दिशानिर्देशों के अनुसार काम करने को कहा है।
वहीं, कई विधायकों ने भी डेंगू नियंत्रण अभियान में लापरवाही, नालियों की सफाई, छिड़काव और आंकड़ों के सही संकलन को लेकर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। ऐसे में 115 मामलों तक पहुंचा डेंगू का आंकड़ा हावड़ा के लिए आने वाले दिनों में बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बन सकता है।