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ऐतिहासिक धरोहर को जब मिला था सम्मान : तब हावड़ा–कालका मेल बनी ‘नेताजी एक्सप्रेस’

वर्ष 1941 में नेताजी ने ब्रिटिश सरकार की कड़ी निगरानी को चकमा देते हुए इसी ट्रेन से “महान पलायन” यात्रा की शुरुआत की थी

मेघा, सन्मार्ग संवाददाता

हावड़ा : आज देश महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती मना रहा है। नेताजी का जीवन साहस, त्याग और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक रहा है। उनका संपूर्ण संघर्ष भारत को विदेशी शासन से मुक्त कराने के संकल्प को समर्पित था। इसी गौरवशाली विरासत को सम्मान देने के उद्देश्य से भारतीय रेलवे ने अपनी ऐतिहासिक ट्रेन हावड़ा–कालका मेल का नाम जनवरी 2021 में बदलकर ‘नेताजी एक्सप्रेस’ रखा।

इतिहास से जुड़ा नामकरण : यह नामकरण केवल औपचारिक बदलाव नहीं, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय से जुड़ा है। वर्ष 1941 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने ब्रिटिश सरकार की कड़ी निगरानी को चकमा देते हुए इसी ट्रेन से अपनी ऐतिहासिक “महान पलायन” यात्रा की शुरुआत की थी। वे भेष बदलकर बिहार के गोमो स्टेशन से इस ट्रेन में सवार हुए, जो आगे चलकर आजाद हिंद फौज के गठन और स्वतंत्रता आंदोलन की दिशा तय करने वाला कदम साबित हुआ। रेलवे मंत्रालय के अनुसार, इस नाम परिवर्तन का उद्देश्य नेताजी के साहस, दूरदृष्टि और बलिदान को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाना है। तत्कालीन रेल मंत्री पीयूष गोयल ने इसे आजादी की लड़ाई का “एक्सप्रेस मार्ग” बताया था।

नेताजी एक्सप्रेस : रूट और समय-सारिणी

ट्रेन नंबर: 12311 / 12312

रूट: हावड़ा जंक्शन (कोलकाता) – कालका

प्रमुख स्टेशन : बर्दवान, दुर्गापुर, आसनसोल, धनबाद, गोमो, प्रयागराज, कानपुर, पुरानी दिल्ली, अंबाला कैंट, चंडीगढ़ और कालका।

समय-सारिणी : 12311 (हावड़ा–कालका):

प्रस्थान – रात 9:55 बजे, आगमन – अगले दिन रात लगभग 3:00 बजे

12312 (कालका–हावड़ा):

प्रस्थान – रात 11:55 बजे, आगमन – तीसरे दिन सुबह लगभग 8:05 बजे

स्वतंत्रता की स्मृतियों को जीवंत करती ट्रेन : ‘नेताजी एक्सप्रेस’ न केवल रेलवे इतिहास की धरोहर है, बल्कि यह उस ऐतिहासिक यात्रा की प्रतीक भी है, जिसने भारत की आजादी की राह को और मजबूत किया। नेताजी की जयंती पर यह ट्रेन उनके अदम्य साहस और राष्ट्र के प्रति समर्पण की चलती-फिरती स्मृति बनकर देशवासियों को प्रेरणा देती है।

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