काेलकाता : कम बजट में घर लेने का सपना अब इतनी आसानी से सच होता हुआ नहीं दिख रहा है। दरअसल, यूएस द्वारा की गयी टैरिफ हाइक का असर रियल एस्टेट मार्केट पर भी पड़ने की संभावना है। विशेषकर किफायती आवासनों के मामले में अधिक असर पड़ सकता है। 50% टैरिफ लगाने के बाद भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव सिर्फ व्यापार में व्यवधान हैं। अगर इसे संयमित नहीं किया गया, तो इसका भारत के किफायती आवास क्षेत्र को संचालित करने वाले कई महत्वपूर्ण, लेकिन कमजाेर क्षेत्रों पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा। एनारॉक ग्रुप के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर, रिसर्च एण्ड एडवाइजरी, डॉ. प्रशांत ठाकुर ने कहा, ‘45 लाख रुपये या उससे कम कीमत वाले घरों की यह श्रेणी पहले ही कोविड-19 महामारी से बुरी तरह प्रभावित हो चुकी है और अभी भी किसी भी तरह की मज़बूती पाने के लिए संघर्ष कर रही है। ट्रंप का टैरिफ हाइक इस क्षेत्र के लिए उम्मीद की सबसे धुंधली किरण को भी बुझा देगा।’ एनारॉक के आंकड़ों से पता चलता है कि 2025 की पहली छमाही तक, किफायती आवास की बिक्री हिस्सेदारी घटकर मात्र 18% रह गई है, यानी शीर्ष 7 शहरों में बेची गई कुल 1.90 लाख इकाइयों में से लगभग 34,565 इकाइयां। यह तथ्य कि 2019 में किफायती आवास की कुल बिक्री हिस्सेदारी 38% से अधिक थी, यह दर्शाता है कि इसकी गति कितनी बुरी तरह लड़खड़ा गई है। इस सेगमेंट में महामारी के बाद की मांग में गिरावट, जो भारत की लगभग 1.46 बिलियन आबादी के लगभग 17.76% लोगों की जरूरतों को पूरा करती है, किफायती आवास की आपूर्ति में गिरावट को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। कुल लॉन्च में इसकी हिस्सेदारी 2019 में 40% से घटकर एच1 2025 में केवल 12% रह गई है।
‘ईज ऑफ बिजनेस और बेहतर करना जरूरी’
क्रेडाई वेस्ट बंगाल के प्रेसिडेंट व मर्लिन ग्रुप के चेयरमैन सुशील मोहता ने कहा, ‘विभिन्न कानूनों के तहत विभिन्न अनुमोदन और मंजूरी प्राप्त करने की समय लेने वाली प्रक्रिया के कारण, ब्याज की लागत में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। सरकार को ईज ऑफ बिजनेस को और बेहतर बनाने के लिए गंभीर कदम उठाने चाहिए, विशेष रूप से कानूनी ढाँचे में आवश्यक बदलाव लागू करके ताकि विकास योग्य भूमि शीघ्र उपलब्ध हो और अनुमोदन प्रक्रिया में तेजी आ सके। इससे उपरिव्यय और ब्याज लागत को कम करने में मदद मिलेगी, जिससे किफायती आवास की कीमत में उल्लेखनीय कमी आएगी। टैरिफ के संबंध में, अर्थव्यवस्था पर अल्पकालिक प्रभाव पड़ सकता है, जिससे आवास सहित कई क्षेत्र प्रभावित होंगे। हालांकि, मुझे नहीं लगता कि इसका कोई दीर्घकालिक प्रभाव होगा।’
अल्पकालीन असर पड़ सकता है
बेलानी समूह के ओनर नंदू बेलानी ने कहा, ‘कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा। कोविड के बाद रियल एस्टेट मार्केट बेहतर गति से आगे बढ़ रहा है। टैरिफ हाइक के कारण अर्थव्यवस्था पर असर पड़ने के साथ-साथ अल्पकालीन असर रियल एस्टेट मार्केट पर पड़ने की संभावना है। हालांकि इसका कोई लंबे समय तक असर नहीं पड़ेगा।’