मधु, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : भारत-नेपाल के बीच व्यापारिक गतिविधियों की अहम कड़ी माने जाने वाले पानीटंकी सीमा पर सैकड़ों ट्रकों के फंसे होने से आर्थिक गतिविधियों पर बड़ा असर पड़ा है। रोजाना लगभग 250 करोड़ रुपये के व्यापार में रुकावट आने से न सिर्फ निर्यातकों और आयातकों को भारी नुकसान हो रहा है, बल्कि इससे जुड़े परिवहन, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और छोटे व्यापारियों की कमाई पर भी सीधा असर पड़ा है। यह गतिरोध भारत-नेपाल द्विपक्षीय व्यापार की रफ्तार को धीमा कर रहा है।
फेडरेशन ऑफ वेस्ट बंगाल ट्रक ऑपरेटर्स एसोसिएशन के महासचिव सजल घोष ने सन्मार्ग से कहा, ‘केवल पानीटंकी सीमा के पास ही नहीं बल्कि पूरे पुरुलिया रोड तक जाम लग गया है। ट्रकों की लंबी कतारें पिछले 3 दिनों में लग गयी हैं। लगभग 400 ट्रक फंसे हुए हैं जो भारत से नेपाल की ओर जा रहे थे। बड़े ट्रकों में मशीनरी पार्ट्स, फ्लाई ऐश, कोयला से लेकर आवश्यकता के अन्य सामान हैं जबकि छोटे ट्रकों में पेरिशेबल यानी जल्द नष्ट होने वाली चीजें हैं।’ उन्होंने कहा, ‘जो ड्राइवर वहां सामान खाली कराने गये थे, वे सभी फंसे हुए हैं और काफी भय में हैं। पहले ही बांग्लादेश में तनाव के कारण वहां सामान भेजना बंद हो गया है और अब नेपाल में ऐसी स्थिति के बाद वहां भी ट्रकों से सामान जाना बंद करना पड़ेगा। ऐसी स्थिति में ट्रक मालिकों को रोजाना लगभग 250 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। इस तरह व्यवसाय करना काफी मुश्किल हो गया है।’ सजल घोष ने बताया कि इसे लेकर उन्होंने राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी व केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर मदद की गुहार लगायी है।
क्लीयरिंग में ही फंसे हैं लगभग 25 ट्रक
कस्टम विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि क्लीयरिंग में ही लगभग 25 ट्रक फंसे हैं जो सामान लेकर नेपाल की ओर जा रहे थे। वहीं नेपाल की नंबर प्लेट वाले भी लगभग 10 ट्रक फंसे हुए हैं। नेपाल में कस्टम कार्यालय में आगजनी के कारण सब काम रुक गया है, उम्मीद है जल्द ही सब कुछ ठीक होगा और फिर व्यवसाय चालू होगा।