सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : 6 वर्ष के अंतराल के बाद कोलकाता में परम पूज्य आनंदमूर्ति गुरु माँ के सान्निध्य में 3 दिवसीय भक्ति, योग और ज्ञान से परिपूर्ण सत्संग श्रृंखला “अमृत वर्षा” का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत गुरु मां के अभिवादन स्वरूप गौड़ीय नृत्य की मधुर लय में गणेश वंदना की विशिष्ट प्रस्तुति से हुई, जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। सच्चिदानंद प्रभु के मंगलाचरण के पश्चात गुरु मां ने अपने प्रवचन में गुरु-शिष्य और भक्त-भगवान के संबंधों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिष्य की गुरु से और भक्त की भगवान से यही प्रार्थना होती है कि वे कभी दूर न जाएं। इस भाव को उन्होंने “श्याम प्यारे दूर न जाया करो” भजन के माध्यम से श्रद्धालुओं के हृदय में जाग्रत किया। गुरु मां ने श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोक “ईश्वरः सर्वभूतानां हृद्देशेऽर्जुन तिष्ठति” का उल्लेख करते हुए कहा कि ईश्वर हर जीव के हृदय में निवास करते हैं। वहीं सन्मार्ग से बात करते हुए उन्होंने कहा कि आज का मनुष्य भी अर्जुन की तरह जीवन के संघर्षों से जूझ रहा है, ऐसे में ईश्वर की इस उपस्थिति का स्मरण ही सबसे बड़ा संबल है। सत्संग की महिमा बताते हुए उन्होंने कहा कि विवेक और प्रज्ञा की प्राप्ति सत्संग से ही होती है और यह सौभाग्य ईश्वर की कृपा से मिलता है। उन्होंने समझाया कि विषय-सुख क्षणिक हैं, जबकि नाम, भजन और चिंतन से प्राप्त आनंद अमृत तुल्य होता है, इसी कारण इस सत्संग श्रृंखला का नाम “अमृत वर्षा” रखा गया है। गुरु मां ने कहा कि धन से सच्चा सुख नहीं मिलता, बल्कि संतोष, विचार और आत्मचिंतन से आता है। योग, प्राणायाम और साधना को जीवन का हिस्सा बनाने, आयुर्वेदिक रात्रिचर्या अपनाने तथा प्रकृति संरक्षण के लिए पेड़ लगाने का भी उन्होंने आह्वान किया। अंत में उन्होंने श्रद्धालुओं से आत्मस्मरण, सुमिरन और शुभ कर्म के मार्ग पर चलकर जीवन को सार्थक बनाने का संदेश दिया। यह कार्यक्रम आगामी 8 फरवरी तक चलेगा।