कोलकाता : श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोेर्ट की 170.4 एकड़ जमीन पर अतिक्रमण है। 706 अतिक्रमणकारियों ने एसपी मुखर्जी पोर्ट अथॉरिटी के कोलकाता डॉक सिस्टम की जमीन पर कब्जा किया है। पिछले 5 वर्षों में पोर्ट ने 2,994.54 करोड़ रुपये लैंड लीजिंग और मोनिटाइजेशन के द्वारा आमदनी की है। इस संबंध में भाजपा के राज्यसभा सांसद शमिक भट्टाचार्य ने संसद में सवाल पूछे जिसके जवाब में उक्त बातें कही गयी। उन्होंने पूछा कि पोर्ट के मालिकाने वाली 5,000 एकड़ जमीन का किन उद्देश्यों से इस्तेमाल किया जा रहा है। कुल कितनी जमीन पर अतिक्रमण किया गया है, कितने अतिक्रमणकारी हैं और उन्हें हटाने के लिये क्या कदम उठाये गये हैं। पोर्ट की भू संपत्ति का कोई ऑडिट किया गया है या नहीं और जमीनों की उपयोगिता, अतिक्रमण और राजस्व क्षमता पर क्या मिला है। गत 5 वर्षों में जमीन लीज पर देने और मॉनिटाइजेशन से कुल कितना राजस्व हुआ है और 1,000 करोड़ राजस्व उगाही के लक्ष्य को पाने के लिए क्या कदम उठाये गये हैं।
उक्त सवालों का जवाब देते हुए केंद्रीय पोर्ट, शिपिंग और जलमार्ग मंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने बताया कि पिछले 5 वर्षों में पोर्ट ने 2994.54 करोड़ राजस्व उगाही की है। जमीनों का मोनिटाइजेशन बढ़ाने के लिए पोर्ट ने कई रणनीतिक पहल की है जिनमें वेयरहाउसिंग की सुविधाओं का विकास, जहाज मरम्मत सेवाएं, नदी किनारों का विकास आदि शामिल है। उन्होंने कहा कि पोर्ट ने अतिक्रमण रोकने और पोर्ट नीत विकास के साथ जमीनों का मोनिटाइजेशन सुनिश्चित करने के लिए बाउंड्री वॉक का निर्माण समेत स्टेटिक गार्ड व मोबाइल पेट्रोल की तैनाती, बस्तियों के पुनर्वास हेतु राज्य प्रबंधन के साथ सामंजस्य शामिल है।
एक नजर में पोर्ट के कोलकाता डॉक सिस्टम की जमीन की उपयोगिता
कस्टम बाउंड एरिया : 421 एकड़
कस्टम बाउंड एरिया के बाहर : 4122 एकड़
कुल जमीन : 4543 एकड़
अतिक्रमण की गयी जमीनाें का विवरण व की गयी कार्रवाई
अतिक्रमण की गयी जमीन : 170.4 एकड़
अतिक्रमणकारियों की संख्या : 706
यह की गयी कार्रवाई
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि रोजाना कार्रवाई की जा रही है, लेकिन समय-समय पर एस्टेट डिविजन और पोर्ट सिक्योरिटी पर्सनल द्वारा निरीक्षण किया जाता है। एक बार अतिक्रमण का पता चलने पर पोेर्ट सिक्योरिटी पर्सनल की मदद से उसे हटाने के लिए काम किया जाता है जिसमें स्थानीय पुलिस की भी मदद ली जाती है। कुछ जमीनों पर पीएसओ गार्ड की तैनाती की जाती है। खाली पड़ी जमीनों के चारों ओर चारदीवारी/बाड़ लगाने का काम तेजी से किया जा रहा है, जो अतिक्रमण के खिलाफ सुरक्षा कवच का काम करता है।
50% से अधिक जमीनों पर हैं बस्तियां
जानकारी के अनुसार, अतिक्रमण की गयी जमीनों में 50% से अधिक पर बस्तियां हैं। अधिकतर बस्तियों में क्लास 3 व 4 के कर्मचारी रहते थे जिनमें से काफी लोगों ने अपने कमरे किराये पर दे दिये। इसके अलावा कई कंपनियों ने पुराने वेयरहाउस पर अतिक्रमण किया है। जिला कोर्ट में इससे संबंधित कई मामले लंबित हैं जिनके निष्पादन में भी काफी समय लग रहा है।