मेघा, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को चिंगड़ीघाटा मेट्रो परियोजना में हुई लंबी देरी के लिए पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास कार्यों में सहयोग के अभाव, प्रशासनिक बाधाओं और कानूनी अड़चनों के कारण कोलकाता मेट्रो की कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं वर्षों तक रुकी रहीं। वैष्णव ने कहा कि चिंगड़ीघाटा मेट्रो परियोजना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। इसके पहले उन्होंने पूरी परियोजा का दौरा किया। उन्होंने कहा, चिंगड़ीघाटा में मेट्रो परियोजना को कोलकाता पुलिस की सलाह के अनुसार तैयार किया गया था। इसके बावजूद तत्कालीन सरकार ने पहले कलकत्ता हाईकोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। पिछली सरकार नहीं चाहती थी कि आम यात्रियों को मेट्रो का लाभ मिले। बाद में जनता ने तृणमूल को सत्ता से बेदखलकर इसका जवाब दिया। उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण, अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) और अन्य प्रशासनिक मंजूरियों में लगातार देरी की गई। वैष्णव ने दावा किया कि राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद अब लंबित परियोजनाओं की बाधाएं तेजी से दूर हो रही हैं। उन्होंने कहा कि जो एनओसी केवल कागजी प्रक्रिया थी, उसे भी वर्षों तक रोका गया। अब वे समस्याएं सुलझ रही हैं और रेलवे परियोजनाओं को तेज गति से आगे बढ़ाया जाएगा। रेल मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कोलकाता मेट्रो नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ है। उनके अनुसार, 1972 से 2014 तक 42 वर्षों में केवल 28 किलोमीटर मेट्रो नेटवर्क विकसित हुआ था, जबकि पिछले 12 वर्षों में इसमें 45 किलोमीटर की वृद्धि हुई है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि अगले 5 वर्षों में कोलकाता मेट्रो के लिए 60 नई पीढ़ी की आधुनिक मेट्रो ट्रेनें शुरू की जाएंगी। साथ ही राज्य के 102 रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास का कार्य भी किया जाएगा। रेल मंत्री ने कहा कि चिंगड़ीघाटा जैसी परियोजनाओं की अड़चनें दूर होने के बाद अब कोलकाता और आसपास के क्षेत्रों में मेट्रो विस्तार तथा रेलवे अवसंरचना विकास को नई गति मिलेगी।