सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता/बांकुड़ा : 6 वर्षों की लंबी प्रतीक्षा, टूटे विश्वास और अधूरी प्रार्थनाओं के बाद आखिरकार बांकुड़ा जिले के विष्णुपुर ब्लॉक स्थित ऐतिहासिक षाड़ेश्वर शिव मंदिर एक बार फिर आम भक्तों के लिए अपने द्वार खोलने जा रहा है। 18 फरवरी से मंदिर शुद्धिकरण और पुनःप्रतिष्ठा के भव्य धार्मिक अनुष्ठानों के साथ इस ऐतिहासिक क्षण का शुभारंभ होगा।
14वीं शताब्दी की विरासत, एएसआई के संरक्षण में मंदिर : विष्णुपुर ब्लॉक के डिहर गांव में स्थित यह मंदिर वर्तमान में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधीन है। इतिहासकारों के अनुसार, वर्ष 1346 में विष्णुपुर के 37वें मल्ल राजा पृथ्वी मल्ल ने लेटराइट पत्थर से इस मंदिर का निर्माण कराया था।
समय के साथ पास से बहने वाली कानानदी के जल प्रवाह से मंदिर की नींव कमजोर हो गई। इसके बाद आए भूकंपों के कारण दीवारों में दरारें पड़ गईं, जिससे व्यापक संरक्षण की आवश्यकता महसूस हुई।
2020 में शुरू हुआ संरक्षण कार्य, कई उतार-चढ़ाव के बाद पूरा : लंबे जनआंदोलन और मांगों के बाद वर्ष 2020 में एएसआई ने मंदिर के संरक्षण कार्य की शुरुआत की। ओडिशा से कुशल शिल्पकार बुलाकर काम शुरू किया गया, हालांकि विभिन्न कारणों से यह कार्य बीच में रुक गया। वर्ष 2021 में दोबारा काम शुरू हुआ। पुरानी पत्थरों को सावधानी से हटाकर उन्हें पालिश कर पुनः स्थापित किया गया। अंततः 2025 में संरक्षण कार्य पूर्ण हुआ और मंदिर को उसके मूल स्वरूप में लौटाया गया।
ढाई से तीन हजार महिलाओं की कलश यात्रा से होगा शुद्धिकरण : इस अवसर पर विष्णुपुर शहर और ब्लॉक के विभिन्न इलाकों से लगभग ढाई से तीन हजार महिलाएं कलश लेकर द्वारकेश्वर नदी से जल लाकर मंदिर परिसर का शुद्धिकरण करेंगी। इसके साथ ही भूमि शुद्धिकरण, यज्ञ और वैदिक कर्मकांड की शुरुआत होगी, जिससे पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण बनेगा।
काशी से 20 ब्राह्मण, तारकेश्वर महाराज की देखरेख में अनुष्ठान : धार्मिक अनुष्ठानों का संचालन तारकेश्वर मंदिर के महाराज की देखरेख में होगा। विशेष रूप से वाराणसी (काशी) से आए लगभग 20 ब्राह्मण वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा-पाठ और पुनःप्रतिष्ठा कर्म संपन्न कराएंगे। मंदिर समिति के अनुसार, यह आयोजन पूरी तरह शास्त्रीय विधि और परंपरा के अनुसार किया जाएगा।
6 साल बाद आम भक्तों को मिलेगा दर्शन-पूजन का अवसर : मंदिर समिति के अनुसार, लंबे समय तक चल रहे संरक्षण और मरम्मत कार्यों के कारण आम भक्तों के लिए मंदिर बंद था। हालांकि इस दौरान गर्भगृह में स्थापित शिवलिंग की नित्य पूजा केवल पुरोहितों द्वारा जारी रही। अब पुनः मंदिर खुलने से श्रद्धालु नियमित पूजा और दर्शन कर सकेंगे।
महामृत्युंजय यज्ञ और 40 हजार श्रद्धालुओं के लिए भोग प्रसाद : मंदिर समिति के कैशियर शंभुनाथ कर ने बताया कि“18 फरवरी को शुद्धिकरण कार्यक्रम से धार्मिक आयोजन शुरू होंगे। 19 फरवरी को मंदिर प्रांगण में महामृत्युंजय यज्ञ होगा। इस दिन विष्णुपुर समेत विभिन्न जिलों से हजारों श्रद्धालुओं के आने की संभावना है।” श्रद्धालुओं के लिए लगभग 40 हजार लोगों के लिए खिचड़ी प्रसाद की व्यवस्था की गई है।
21 फरवरी को बाबा भैरव की भव्य शोभायात्रा : 21 फरवरी को समीप स्थित शैलेश्वर मंदिर से बाबा भैरव को विधिवत शोभायात्रा के साथ षाड़ेश्वर मंदिर लाया जाएगा। यह अनुष्ठान भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा।
गाजन उत्सव की घर-वापसी : पिछले 6 वर्षों से गाजन उत्सव शैलेश्वर मंदिर में आयोजित किया जा रहा था। इस वर्ष से चैत्र मास का गाजन उत्सव पुनः षाड़ेश्वर मंदिर परिसर में ही आयोजित होगा। वर्तमान में मंदिर की चारदीवारी (पांचिल) का निर्माण कार्य भी प्रगति पर है।
आस्था, इतिहास और पहचान का प्रतीक षाड़ेश्वर : मंदिर समिति का कहना है कि षाड़ेश्वर मंदिर केवल एक पूजा स्थल नहीं, बल्कि क्षेत्र के लोगों की आस्था, स्मृति और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा हुआ है। वर्षों बाद इसके पुनः खुलने से न सिर्फ धार्मिक गतिविधियां लौटेंगी, बल्कि विष्णुपुर और आसपास के क्षेत्रों में धार्मिक पर्यटन को भी नया जीवन मिलेगा।