मेघा, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : शहर की जोका–एस्प्लानेड मेट्रो परियोजना, जिसे पर्पल लाइन के नाम से जाना जाता है, ने एक अहम उपलब्धि हासिल कर ली है। इस परियोजना में लगी टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) ‘दुर्गा’ ने कोलकाता के ऐतिहासिक रॉयल कलकत्ता टर्फ क्लब (आरसीटीसी) के नीचे से सुरक्षित रूप से टनल बनाते हुए अपना रास्ता तय कर लिया है। 1847 में स्थापित कोलकाता रेसकोर्स का हिस्सा आरसीटीसी शहर की प्रमुख विरासत स्थलों में गिना जाता है। वर्ष 1901–02 में बने इसके हेरिटेज स्टैंड्स के नीचे से टनल निकालना एक बेहद संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण कार्य था। रेलवे विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) के अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे हिस्से में अत्यंत सावधानी बरती गई और हेरिटेज संरचनाओं में किसी भी प्रकार की ज़मीन धंसने की आशंका को देखते हुए लाइव मॉनिटरिंग सेंसर लगाए गए थे। आरवीएनएल के मुताबिक, टीबीएम ‘दुर्गा’ ने खिदिरपुर से जुलाई में एस्प्लानेड की ओर टनल खोदना शुरू किया था और नवंबर के अंत तक आरसीटीसी क्षेत्र में पहुंच गई थी। लगभग 600 मीटर लंबे इस हेरिटेज जोन को दो महीनों में पार कर मशीन अब विक्टोरिया मेमोरियल स्टेशन की दिशा में आगे बढ़ चुकी है। ‘दुर्गा’ करीब 100 मीटर लंबी, लगभग 600 टन वजनी है और इसका बाहरी व्यास 6.6 मीटर है।
‘दुर्गा’ जून 2026 में विक्टोरिया स्टेशन तक पहुंचेगी : आरवीएनएल ने बताया कि खिदिरपुर से विक्टोरिया तक टनल निर्माण का पहला चरण दिसंबर 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा। योजना के अनुसार, टीबीएम ‘दुर्गा’ जून 2026 में विक्टोरिया स्टेशन तक पहुंचेगी। समानांतर दूसरी टनल की खुदाई कर रही दूसरी टीबीएम ‘दिव्या’ वर्तमान में टॉली नाला तक पहुंच चुकी है और इसके फरवरी में आरसीटीसी क्षेत्र तक पहुंचने की उम्मीद है। ‘दिव्या’ के दिसंबर 2026 में विक्टोरिया पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है।परियोजना से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि पार्क स्ट्रीट तक टनल निर्माण मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। खिदिरपुर स्थित सेंट थॉमस बॉयज़ स्कूल के परिसर में बनाए गए एक बड़े लॉन्चिंग शाफ्ट के जरिए दोनों टीबीएम को जमीन के नीचे उतारा गया था। खिदिरपुर और पार्क स्ट्रीट के बीच कुल 1.7 किलोमीटर लंबी टनल तैयार होने के बाद इन मशीनों का काम पूरा हो जाएगा। वहीं, पार्क स्ट्रीट से एस्प्लानेड के बीच के हिस्से में टीबीएम से टनल निर्माण नहीं किया जाएगा।
गौरतलब है कि पर्पल लाइन का एक हिस्सा पहले ही जोका से माझेरहाट तक 8 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड सेक्शन के रूप में संचालित हो रहा है। आरसीटीसी के नीचे से ‘दुर्गा’ के सुरक्षित गुजरने को इस महत्वाकांक्षी मेट्रो परियोजना के लिए एक बड़ी तकनीकी और विरासत-संरक्षण संबंधी सफलता माना जा रहा है।