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दक्षिण-पूर्व रेलवे की बड़ी पहल : सांकराइल में नया कोचिंग टर्मिनल

हावड़ा, शालीमार और सांतरागाछी टर्मिनलों का भार होगा कम 2030 तक चरणबद्ध रूप से बढ़ेगी रेल अवसंरचना की क्षमता

मेघा, सन्मार्ग संवाददाता

हावड़ा : यात्रियों की बढ़ती संख्या और लगातार बढ़ रही भीड़ को देखते हुए दक्षिण-पूर्व रेलवे ने बड़ा कदम उठाया है। हावड़ा, शालीमार और सांतरागाछी टर्मिनलों पर दबाव कम करने के उद्देश्य से खड़गपुर डिविजन के सांकराइल इलाके में एक नए कोचिंग टर्मिनल के निर्माण की योजना की घोषणा की गई है। कुछ दिन पहले रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया था कि देश के बड़े शहरों में नए कोचिंग टर्मिनल बनाए जाएंगे और मौजूदा टर्मिनलों का आधुनिकीकरण किया जाएगा, ताकि रेल सेवाओं को और बेहतर किया जा सके। रेलवे का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में बड़े शहरों में नयी ट्रेनों के संचालन की क्षमता को दोगुना करना है। इसके लिए बुनियादी ढांचे के तेजी से विस्तार पर भी जोर दिया जा रहा है। रेलवे के अनुसार, वर्ष 2030 तक चरणबद्ध तरीके से टर्मिनलों की क्षमता बढ़ाई जाएगी। इसके तहत अतिरिक्त प्लेटफॉर्म, यार्ड, मेंटेनेंस कॉम्प्लेक्स, मल्टी-ट्रैकिंग और सिग्नलिंग के आधुनिकीकरण जैसे कई कार्य किए जाएंगे। कोलकाता क्षेत्र के लिए सांकराइल को नया केंद्र बनाने की योजना है। वर्तमान में हावड़ा, सांतरागाछी और शालीमार—इन तीन प्रमुख टर्मिनलों से मुंबई, चेन्नई समेत कई महत्वपूर्ण लंबी दूरी की ट्रेनें चलती हैं। रोजाना औसतन 30 मेल-एक्सप्रेस और लगभग 76 जोड़ी लोकल ट्रेनें यहां से संचालित होती हैं, जिससे इन टर्मिनलों पर भारी दबाव बना हुआ है। ऐसे में आबादा और सांकराइल स्टेशनों के बीच नए कोचिंग टर्मिनल की योजना को बेहद अहम माना जा रहा है। हावड़ा से लगभग 15 किलोमीटर दूर प्रस्तावित यह नया टर्मिनल शुरू होने से और अधिक नई ट्रेनों का संचालन संभव हो सकेगा। यह टर्मिनल राष्ट्रीय राजमार्ग-16 के पास स्थित होगा, जिससे सड़क मार्ग से पहुंच भी आसान होगी। साथ ही, आबादा, सांकराइल और आंदुल जैसे महत्वपूर्ण स्टेशनों से लोकल ट्रेन के जरिए यात्री आसानी से यहां पहुंच सकेंगे। साउथ ईस्टर्न रेलवे हावड़ा-जकपुर पैसेंजर एसोसिएशन के महासचिव अजय दोलुई ने कहा, “दूरगामी ट्रेनें अक्सर लाइन ब्लॉक कर देती हैं, जिससे लोकल ट्रेनों के आने-जाने में देरी होती है। सांकराइल में पर्याप्त जमीन उपलब्ध है। वहां नया कोचिंग टर्मिनल बनने से हावड़ा, शालीमार और सांतरागाछी का दबाव कम होगा और लोकल ट्रेन सेवाओं में तेजी आएगी।” रेलवे अधिकारियों ने बताया कि इस परियोजना को जल्द से जल्द लागू करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। परियोजना पूरी होने के बाद दक्षिण-पूर्व रेलवे भविष्य में बढ़ते यात्री भार को संभालने में कहीं अधिक सक्षम होगी और कोलकाता, हावड़ा व आसपास के इलाकों के यात्रियों को बड़ी सुविधा मिलेगी।

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