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हावड़ा में सुरक्षा नियम ताक पर, हादसे ने खोली निर्माण व्यवस्था की पोल

ट्रेड सेंटर हादसे के बाद जागा प्रशासन, पूरे शहर में विशेष निगरानी सभी निर्माण परियोजनाओं का स्थलीय निरीक्षण करेंगे निगम के अधिकारी

मेघा, सन्मार्ग संवाददाता

हावड़ा : हावड़ा ट्रेड सेंटर की 11वीं मंजिल की छत से भारी लोहे का पाइप गिरने से दो लोगों की दर्दनाक मौत के बाद आखिरकार प्रशासन हरकत में आ गया है। इस घटना ने शहर में चल रहे निर्माण कार्यों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे के बाद हावड़ा नगर निगम ने विशेष निगरानी अभियान शुरू करने की घोषणा की है। नगर निगम की एक विशेष टीम अब विभिन्न वार्डों में जाकर सभी निर्माण परियोजनाओं का स्थलीय निरीक्षण करेगी और यह जांच करेगी कि सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है या नहीं।

ठेका मजदूर गिरफ्तार, 5 दिन की पुलिस हिरासत : इस मामले में पुलिस ने मोहम्मद ताजउद्दीन नामक एक ठेका मजदूर को गिरफ्तार किया है। उसके खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। बुधवार को उसे हावड़ा कोर्ट में पेश किया गया, जहां न्यायाधीश ने उसे पांच दिनों की पुलिस हिरासत में भेजने का निर्देश दिया।

सुरक्षा मानकों की खुली अनदेखी : नगर निगम के भवन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, किसी भी निर्माण कार्य के दौरान कई अनिवार्य सुरक्षा नियमों का पालन करना होता है। शहरी विकास विभाग की स्पष्ट गाइडलाइन के तहत निर्माण स्थल पर ‘सेफ्टी नेट’ लगाना अनिवार्य है, ताकि ऊपर से गिरने वाली ईंट, लोहे की छड़ या पत्थर से राहगीरों को नुकसान न पहुंचे। साथ ही निर्माण स्थल को पॉलिथीन या जूट से घेरना, नीचे चेतावनी बोर्ड लगाना और आम लोगों की आवाजाही को नियंत्रित करना जरूरी है। मजदूरों के लिए हेलमेट और सेफ्टी बेल्ट अनिवार्य हैं। धूल और शोर नियंत्रण के भी प्रावधान हैं। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि हादसे के समय स्थल पर न तो सेफ्टी नेट था और न ही कोई बैरिकेडिंग। निर्माण कार्य के बावजूद नीचे से आम लोगों की आवाजाही जारी थी, जिसके कारण यह जानलेवा दुर्घटना हुई।

कई इलाकों में मिलीं अनियमितताएं : नगर निगम की टीम ने शिवपुर, बाली, दासनगर और टिकियापाड़ा सहित कई इलाकों का दौरा किया। वहां भी कई निर्माण स्थलों पर सुरक्षा नियमों की अनदेखी पायी गयी। खासकर मध्यम और छोटे स्तर के फ्लैट निर्माण में नियमों का पालन लगभग नहीं के बराबर देखा गया। स्थानीय लोगों ने प्रमोटरों के खिलाफ नाराजगी जताई, लेकिन प्रभावशाली बिल्डरों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने से डरने की बात भी स्वीकार की।

निगम की सख्ती-काम बंद और लाइसेंस निलंबन की चेतावनी : नगर निगम के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जहां भी सुरक्षा नियमों का उल्लंघन पाया जाएगा, वहां तत्काल निर्माण कार्य रोक दिया जाएगा। संबंधित निर्माण कंपनियों पर जुर्माना लगाया जाएगा और लाइसेंस निलंबन जैसी कठोर कार्रवाई भी की जा सकती है। पहले ही कई निर्माण कंपनियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है।

ठेकेदारों पर खर्च बचाने का आरोप : हावड़ा की प्रमुख निर्माण कंपनी के एक अधिकारी ने बताया कि अधिकांश मजदूर ठेकेदारों या सब-कॉन्ट्रैक्टर के अधीन काम करते हैं। कई बार ठेकेदार लागत बचाने के लिए सुरक्षा नियमों की अनदेखी करते हैं। मजदूरों में भी जागरूकता की कमी होती है लेकिन हादसे की स्थिति में आरोप निर्माण कंपनी पर ही लगता है।

जिम्मेदारी तय करने की मांग : इस हादसे ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी जानलेवा साबित हो सकती है। अब देखना यह है कि प्रशासन की यह सख्ती कितने दिनों तक कायम रहती है और क्या वास्तविक जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो पाती है या नहीं। फिलहाल, शहर के नागरिक यही सवाल पूछ रहे हैं, आखिर निर्माण स्थलों पर सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?

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