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आरजी कर कांड की जांच के लिए गठित कमेटी की पहली बैठक

स्वास्थ्य मंत्री बोले—‘जल्द मिलेगा न्याय’

मेघा, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता: आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में महिला डॉक्टर-छात्रा के साथ दुष्कर्म और हत्या तथा अस्पताल में कथित भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच के लिए पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग द्वारा गठित स्वतंत्र समिति की पहली बैठक गुरुवार को हुई। समिति की अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायाधीश शुभ्रकमल मुखोपाध्याय कर रहे हैं। समिति में पूर्व स्वास्थ्य-शिक्षा निदेशक देवाशीष भट्टाचार्य, फोरेंसिक विशेषज्ञ तापस बसु तथा भाजपा विधायक डॉ. राजेश कुमार और दीपांजन चक्रवर्ती भी शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, दोनों भाजपा विधायकों को जांच संबंधी अनुभव को ध्यान में रखते हुए समिति में शामिल किया गया है। राजेश कुमार सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी हैं, जबकि दीपांजन चक्रवर्ती एनएसजी की पूर्व कमांडो इकाई से जुड़े रहे हैं। जांच समिति यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि आरजी कर अस्पताल में संदीप घोष के कार्यकाल के दौरान सामने आए कथित भ्रष्टाचार का मृत महिला डॉक्टर की घटना से कोई संबंध था या नहीं। इसके साथ ही अस्पताल की व्यवस्था और बुनियादी ढांचे में उस समय क्या कमियां थीं तथा बाद में उन्हें किस तरह दूर किया गया, इसकी भी जांच की जाएगी। स्वास्थ्य मंत्री शारद्वत मुखोपाध्याय ने कहा कि इस मामले में किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पीड़िता के परिवार और पूरे चिकित्सा समुदाय के साथ सरकार खड़ी है तथा निष्पक्ष जांच के बाद जल्द न्याय सुनिश्चित करने की कोशिश की जाएगी। मंत्री के मुताबिक, स्वास्थ्य विभाग की जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उन्हें केंद्रीय जांच एजेंसी के साथ साझा किया जाएगा। जांच के दौरान पीड़िता के शिक्षकों और मामले से जुड़े अन्य लोगों के बयान भी लिए जाएंगे। आरजी कर मामले की प्रारंभिक जांच कोलकाता पुलिस ने शुरू की थी। बाद में कलकत्ता हाई कोर्ट के निर्देश पर जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी। सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में संजय रॉय को मुख्य आरोपी बताया था। बाद में अदालत ने उसे दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। हालांकि, पीड़िता के परिवार ने जांच की प्रक्रिया पर कई बार असंतोष जताया है। परिवार की ओर से यह सवाल भी उठाया गया है कि घटना से पहले अस्पताल में क्या हुआ था और उस समय मौजूद लोगों की भूमिका की पूरी तरह जांच क्यों नहीं की गई। अब स्वास्थ्य विभाग की नई समिति की जांच से इन सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद की जा रही है।


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