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मोदी सरकार में पश्चिम बंगाल को रेलवे का बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर बूस्ट

63 परियोजनाओं पर तेजी से काम, परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत 83,433 करोड़ रुपये 

सन्मार्ग संवाददाता

नई दिल्ली/कोलकाता : केंद्र सरकार ने बंगाल में रेलवे अवसंरचना के विकास को लेकर बड़ा दावा किया है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में भाजपा के पश्चिम बंगाल प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद समीक भट्टाचार्य के प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि मोदी सरकार के दौरान राज्य में रेलवे परियोजनाओं के लिए बजटीय आवंटन और विकास कार्यों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। रेल मंत्री के अनुसार, वर्ष 2009-14 के दौरान पश्चिम बंगाल के लिए रेलवे का औसत वार्षिक बजट 4,380 करोड़ रुपये था, जिसे बढ़ाकर वर्ष 2026-27 में 14,205 करोड़ रुपये कर दिया गया है। यह पहले की तुलना में तीन गुने से भी अधिक है। सरकार ने बताया कि राज्य में वर्तमान में 63 रेलवे परियोजनाएं स्वीकृत हैं, जिनमें 14 नई रेल लाइनें, चार गेज परिवर्तन तथा 45 दोहरीकरण परियोजनाएं शामिल हैं। इन परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत 83,433 करोड़ रुपये है और इनकी कुल लंबाई 5,148 किलोमीटर है। मार्च 2026 तक इन परियोजनाओं के तहत 1,721 किलोमीटर रेल लाइन का कार्य पूरा किया जा चुका है, जबकि अब तक 27,949 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। लिखित उत्तर में यह भी कहा गया कि मई 2026 से राज्य सरकार के साथ बेहतर समन्वय के कारण भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में उल्लेखनीय तेजी आई है। इसके चलते लंबे समय से लंबित कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं में प्रगति दर्ज की गई है। इनमें कलियागंज–बुनियादपुर रेल लाइन, नैहाटी–रानाघाट तीसरी लाइन, सैंथिया बाईपास, अनारा रेल फ्लाईओवर, गौरीनाथधाम रेल फ्लाईओवर तथा नवद्वीपधाम–नवद्वीपधाम नई रेल लाइन परियोजना शामिल हैं। रेल मंत्रालय ने बताया कि परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने और विभिन्न बाधाओं के समाधान के लिए पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय टास्क फोर्स का गठन भी किया गया है। हालांकि, मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि रेलवे परियोजनाओं का समय पर पूरा होना भूमि अधिग्रहण, वन एवं अन्य वैधानिक स्वीकृतियों, उपयोगिता सेवाओं के स्थानांतरण तथा कानून-व्यवस्था जैसी परिस्थितियों पर भी निर्भर करता है।

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