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विदेशी पर्यटकों के आगमन में देश में दूसरा स्थान, बढ़ी वैश्विक पहचान

पर्यटन और संस्कृति से रफ्तार पकड़ती बंगाल की अर्थव्यवस्था, रोजगार के नये अवसर सृजित

मेघा, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : पश्चिम बंगाल में पर्यटन आज आर्थिक विकास और रोजगार सृजन का एक प्रमुख आधार बन चुका है। विदेशी पर्यटकों के आगमन के मामले में राज्य देश में दूसरे स्थान पर है, जो इसकी बढ़ती राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान को दर्शाता है। सुंदरबन, दार्जिलिंग की पहाड़ियां, समुद्री तट, विरासत नगरों, धार्मिक और तीर्थ स्थलों का एकीकृत विकास कर कनेक्टिविटी, ठहराव और पर्यटक सुविधाओं को मजबूत किया गया है। इससे होटल, परिवहन, होम-स्टे, हस्तशिल्प, टूर संचालन और सहायक सेवाओं में बड़े पैमाने पर आजीविका के अवसर पैदा हुए हैं। पर्यटन विभाग की नीतियों और दिशा-निर्देशों से कौशल विकास को बढ़ावा मिला है। 30 नवंबर 2025 तक पर्यटन विभाग में 5,409 होम-स्टे पंजीकृत हुए हैं, जबकि वन और जनजाति विकास विभागों के तहत भी हजारों होम-स्टे जुड़े हैं। इनसे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 43 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। 240 से अधिक टूरिज्म सर्विस प्रोवाइडर्स को भी विभाग ने जोड़ा है। सेवा गुणवत्ता और कौशल उन्नयन के लिए ‘टूरिज्म सर्विस प्रोवाइडर कैपेसिटी बिल्डिंग स्कीम-2023’ लागू की गई है। पर्यटक गाइडों के लिए 2021 में शुरू की गई प्रमाणन योजना के तहत अब तक 2,050 उम्मीदवारों का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है, जबकि 1,800 से अधिक प्रशिक्षणाधीन हैं। इनमें 450 से ज्यादा महिला गाइड शामिल हैं। दुर्गापुर स्थित राज्य संचालित होटल प्रबंधन संस्थान ‘आहोरण’ भी आतिथ्य उद्योग के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार कर रहा है। कोलकाता, सिलीगुड़ी, दार्जिलिंग, कलिम्पोंग और दीघा जैसे क्षेत्र MICE (मीटिंग, कॉन्फ्रेंस, एग्जीबिशन) हब के रूप में उभर रहे हैं। 2025-26 में कोलकाता में 867 बड़े आयोजन हुए। पर्यटन को 2023 में ‘उद्योग का दर्जा’ मिलने से निवेश को बढ़ावा मिला है और अगले दो वर्षों में 42 प्रीमियम होटल शुरू होने की उम्मीद है। संस्कृति को विकास की आत्मा मानते हुए सरकार ने 1.92 लाख से अधिक लोक कलाकारों को सहयोग दिया है। लोक संगीत, नृत्य, बाउल परंपरा, जनजातीय संस्कृति और विरासत स्थलों के संरक्षण को पर्यटन से जोड़कर टिकाऊ सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था तैयार की जा रही है। आंकड़ों के अनुसार 2022 से 2024 के बीच पर्यटकों की संख्या में 45 प्रतिशत से अधिक की औसत वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे पश्चिम बंगाल देश के सबसे पसंदीदा पर्यटन स्थलों में शामिल हो गया है।


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