हुगली: अच्छी नौकरी छोड़कर साइबर ठगी का रास्ता अपनाने वाले एक युवक समेत 12 लोगों को चंदननगर पुलिस कमिश्नरेट की साइबर शाखा ने गिरफ्तार किया है। पुलिस ने विभिन्न थानों में दर्ज पांच अलग-अलग मामलों की जांच के दौरान यह कार्रवाई की। मामले में एक अन्य व्यक्ति को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। गिरफ्तार आरोपियों की उम्र 22 से 45 वर्ष के बीच बताई गई है। पुलिस को संदेह है कि इस नेटवर्क के जरिए देश के विभिन्न राज्यों में लोगों को अपना शिकार बनाया गया और अब तक 20 लाख रुपये से अधिक की साइबर ठगी की जा चुकी है। हालांकि, रकम और पीड़ितों की वास्तविक संख्या जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, उत्तरपाड़ा का रहने वाला एक आरोपी इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ाई कर चुका है और एक मल्टीनेशनल आईटी कंपनी में नौकरी भी करता था। बाद में उसने नौकरी छोड़ दी और कथित तौर पर साइबर ठगी के गिरोह में शामिल हो गया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि वह इस नेटवर्क से कब और कैसे जुड़ा तथा ठगी से उसके कितने लोगों से संपर्क थे। गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से कई डेबिट और क्रेडिट कार्ड, पैन कार्ड, चेकबुक, बैंक पासबुक, 3 मोबाइल फोन और 7 सिम कार्ड बरामद किए गए हैं। पुलिस को आशंका है कि इन बैंकिंग दस्तावेजों और मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल साइबर ठगी के लिए किया जाता था। चंदननगर पुलिस के डीसीपी (डीडी) रूपांतर सेनगुप्ता ने बताया कि आरोपियों के घर अलग-अलग इलाकों में हैं। कुछ आरोपी एक-दूसरे को जानते थे, जबकि कुछ के बीच सीधा संपर्क नहीं था। हालांकि, उनकी ठगी का तरीका काफी हद तक एक जैसा था। आरोपियों पर कभी वाट्सएप या मोबाइल मैसेज के जरिए लिंक भेजकर लोगों को जाल में फंसाने और कभी किसी लाभ या सुविधा का लालच देकर ठगी करने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, कुछ मामलों में आरोपियों ने झारखंड के जामताड़ा साइबर ठगी गिरोह की तर्ज पर वारदात को अंजाम दिया। जांच अधिकारियों को आशंका है कि इस नेटवर्क में और भी कई लोग शामिल हो सकते हैं। पुलिस का कहना है कि आरोपियों का नेटवर्क देश के विभिन्न हिस्सों तक फैला हो सकता है। ऐसे में पूरे गिरोह तक पहुंचने में समय लग सकता है। कार्रवाई के दौरान एसीपी (डीडी) सुमन चक्रवर्ती, साइबर इंस्पेक्टर-इन-चार्ज सत्यजीत मंडल समेत साइबर शाखा के अन्य अधिकारी मौजूद थे।