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चिंगड़ीघाटा की 366 मीटर का कार्य पूरा होते ही बनेगा कोलकाता का पहला “मेट्रो रिंग”

करीब ढेड़ साल बाद शुरू हुआ काम, शहर की सभी प्रमुख लाइनें होंगी कनेक्ट

मेघा, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : कोलकाता मेट्रो के बहुप्रतीक्षित चिंगड़ीघाटा सेक्शन पर काम दोबारा शुरू हो गया है। चिंगड़ीघाटा में पिछले 15 महीनों से बंद पड़ा मेट्रो वायाडक्ट निर्माण कार्य आखिरकार शुक्रवार शाम फिर से शुरू हो गया। शुक्रवार रात 7:55 बजे 500 मीट्रिक टन क्षमता वाला लॉन्चर दोबारा सक्रिय हुआ और 28 मीटर लंबे कंक्रीट सेगमेंट को लगाने की प्रक्रिया शुरू की गई। करीब 15 मिनट में लॉन्चर ने 5 मीटर की दूरी तय की। शहर के पहले “मेट्रो रिंग” प्रोजेक्ट को नई रफ्तार मिल गई है। चिंगड़ीघाटा क्रॉसिंग पर काम शुरू होने के साथ ही ईएम बाइपास इलाके में व्यापक ट्रैफिक व्यवस्था लागू की गई। उल्टाडांगा की ओर जाने वाले वाहनों को उस नई सड़क से गुजारा गया, जिसे आरवीएनएल ने दिसंबर 2024 में विशेष रूप से निर्माण कार्य के लिए तैयार किया था। पुलिस ने रात 8:23 बजे तक उल्टाडांगा जाने वाले हिस्से को पूरी तरह खाली करा दिया, ताकि 12 मीटर ऊंचाई पर कंक्रीट सेगमेंट स्थापित करने का काम सुरक्षित ढंग से किया जा सके। रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) के मुख्य परियोजना प्रबंधक विपिन कुमार ने बताया कि पहले चरण में सोमवार सुबह 8 बजे तक लगातार 60 घंटे काम चलेगा। इस दौरान पियर संख्या 317 और 318 के बीच 28 मीटर लंबे हिस्से को जोड़ा जाएगा। निर्माण कार्य शुरू होने के मौके पर आरवीएनएल अधिकारियों ने पूजा-अर्चना भी की। चिंगड़ीघाटा में 366 मीटर का अधूरा हिस्सा ही ऑरेंज लाइन के बेलेघाटा-सेक्टर फाइव खंड की सबसे बड़ी बाधा बना हुआ था। मुख्य जनसंपर्क अधिकारी एस एस कन्नन ने उम्मीद जताई कि ऑरेंज लाइन इस वर्ष दिसंबर तक सेक्टर फाइव तक पहुंच जाएगी।

कैसे बनेगा “मेट्रो रिंग”?

अभी तक आरेंज लाइन (Kolkata Metro) का संचालन न्यू गरिया से रुबी मोड़ तक हो रहा है। लेकिन चिंगड़ीघाटा में 366 मीटर का अधूरा वायाडक्ट सेक्टर-5 तक लाइन पहुंचने में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ था, मगर अब यह हिस्सा पूरा होते ही यात्री:

* ब्लू लाइन से न्यू गरिया पहुंचेंगे

* वहां से ऑरेंज लाइन पकड़कर सेक्टर-5 जा सकेंगे

* सेक्टर-5 में ग्रीन लाइन से इंटरचेंज मिलता है।

* ग्रीन लाइन से यात्री एस्प्लेनेड और हावड़ा मैदान पहुंचते हैं

* एस्प्लेनेड में ब्लू लाइन से पहले ही ग्रीन लाइन जुड़ा हुआ है

* एयरपोर्ट पहले से ही ब्लू व ग्रीन लाइन से जुड़ा है।

यानी पूरा नेटवर्क एक गोलाकार “मेट्रो रिंग” का रूप ले लेगा।

तीन बड़े इंटरचेंज बनेंगे रिंग की रीढ़

मेट्रो अधिकारियों के मुताबिक इस रिंग नेटवर्क की सबसे बड़ी ताकत 3 इंटरचेंज स्टेशन हैं। —

एस्प्लेनेड मेट्रो स्टेशन, कवि सुभाष मेट्रो स्टेशन एवं साल्टलेक मेट्रो स्टेशन। इन स्टेशनों के जरिए यात्री आसानी से लाइन बदल सकेंगे और उत्तर, दक्षिण, पूर्व तथा हावड़ा क्षेत्र के बीच तेज कनेक्टिविटी मिलेगी।

भाजपा सरकार बनने के बाद तेज हुई प्रक्रिया

करीब तीन वर्षों से चिंगड़ीघाटा में जमीन और ट्रैफिक अनुमति से जुड़ी अड़चन के कारण काम रुका हुआ था। अब राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद प्रशासनिक स्तर पर मंजूरी मिलने के साथ परियोजना को दोबारा गति मिली है। रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) ने चिंगड़ीघाटा क्रॉसिंग पर अंतिम दो स्पैन लॉन्च करने की तैयारी शुरू कर दी है। इनमें 28 मीटर और 34 मीटर के गर्डर शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार शेष 304 मीटर वायाडक्ट पूर्वी ड्रेनेज चैनल और सुकांतनगर इलाके से होकर गुजरेगा।

भविष्य में और बड़ा होगा नेटवर्क

मेट्रो रेलवे केवल एक रिंग पर नहीं रुकना चाहती। भविष्य में पर्पल लाइन को एस्प्लेनेड और टॉलीगंज में ब्लू लाइन से जोड़ा जाएगा। एयरपोर्ट पर येलो लाइन के अलावा अब ऑरेंज लाइन का इंटरचेंज मिलेगा। इसके बाद यात्री न्यू गरिया से एयरपोर्ट, सेक्टर-5, हावड़ा और एस्प्लेनेड तक सर्कुलर तरीके से यात्रा कर सकेंगे।

शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को मिलेगा बड़ा लाभ

विशेषज्ञों का मानना है कि मेट्रो रिंग बनने के बाद

* ऑरेंज लाइन का काम पूरा होने से ईएम बाईपास पर दबाव घटेगा

* सेक्टर-5 और न्यू टाउन के आईटी कर्मचारियों को राहत मिलेगी

* दक्षिण कोलकाता से हावड़ा पहुंचना आसान होगा

* एयरपोर्ट, साल्टलेक और दक्षिण कोलकाता के बीच यात्रा समय काफी कम होगा

यही कारण है कि चिंगड़ीघाटा का 366 मीटर हिस्सा अब पूरे कोलकाता मेट्रो नेटवर्क की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।


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