कोलकाता: वायु गुणवत्ता और प्रदूषण नियंत्रण के मामले में पश्चिम बंगाल की स्थिति एक बार फिर चिंता बढ़ाने वाली सामने आई है। केंद्र सरकार के नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (एनकैप)-2026 की रिपोर्ट में 10 लाख से अधिक आबादी वाले देश के 48 शहरों में कोलकाता को 38वां स्थान मिला है। पिछले साल महानगर 37वें स्थान पर था। यानी इस बार कोलकाता एक पायदान और नीचे खिसक गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, औद्योगिक शहर हावड़ा 31वें और आसनसोल 23वें स्थान पर है। दो वर्ष पहले आसनसोल इस सूची में 16वें स्थान पर था। वहीं, तीन लाख से कम आबादी वाले शहरों की श्रेणी में हल्दिया छठे स्थान पर रहा है। इस श्रेणी में ओडिशा का कलिंगनगर पहले स्थान पर है।
एनकैप की यह रैंकिंग केवल वायु गुणवत्ता के आधार पर नहीं, बल्कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए शहरों की ओर से उठाए गए विभिन्न कदमों के मूल्यांकन के आधार पर तैयार की गई है। 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में 198 अंक हासिल कर लखनऊ शीर्ष पर है। लगातार आठ बार देश के सबसे स्वच्छ शहर का खिताब हासिल कर चुका इंदौर इस बार दूसरे स्थान पर है। वहीं, दिल्ली 21वें स्थान पर है और उसे 172 अंक मिले हैं। कोलकाता का स्कोर 142.2 रहा। मुंबई 28वें और चेन्नई 35वें स्थान पर हैं।
केंद्र के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने जनवरी 2019 में देश की वायु गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम शुरू किया था। इसके तहत पश्चिम बंगाल के कोलकाता, हावड़ा, बैरकपुर, दुर्गापुर, आसनसोल और हल्दिया को शामिल किया गया है। इन शहरों में प्रदूषण कम करने के लिए केंद्र की ओर से हर साल बड़ी राशि आवंटित की जाती है। हालांकि, राज्य में इस राशि का समुचित आवंटन नहीं होने का आरोप भी सामने आया है।