मेघा, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : देश की पहली मेट्रो रेल सेवा के रूप में वर्ष 1984 में शुरू हुई कोलकाता मेट्रो अब बहु-कॉरिडोर शहरी परिवहन नेटवर्क का रूप ले चुकी है। 24 अक्टूबर 1984 को एस्प्लेनेड से भवानीपुर (अब नेताजी भवन) के बीच 3.4 किमी लंबे मार्ग और तीन इंटरमीडिएट स्टेशनों से शुरू हुई सेवा का विस्तार अब 5 कलर-कोडेड लाइनों, 58 स्टेशनों और 73.42 किमी के नेटवर्क तक हो चुका है। मेट्रो परियोजना की शुरुआत 1972 में हुई थी। वर्ष 1972 से 2014 के बीच 28 किमी मेट्रो मार्ग चालू किया गया, जबकि 2014 से 2025 के बीच 45 किमी नई लाइन चालू हुई। इसमें कवि सुभाष-नोआपाड़ा ब्लू लाइन का 28 किमी हिस्सा, नोआपाड़ा-दक्षिणेश्वर 4.14 किमी विस्तार, नोआपाड़ा-जय हिंद विमानबंदर 6.77 किमी येलो लाइन, जोका-माझेरहाट 7.74 किमी पर्पल लाइन, न्यू गरिया-बेलेघाटा 9.8 किमी ऑरेंज लाइन और हावड़ा मैदान-साल्टलेक सेक्टर-5 की 16.55 किमी ग्रीन लाइन शामिल है। कोलकाता मेट्रो की प्रमुख इंजीनियरिंग उपलब्धियों में हुगली नदी के नीचे बनी सुरंग भी शामिल है। ग्रीन लाइन की जुड़वां अंडर-रिवर सुरंगें 520 मीटर लंबी हैं और इन्हें 66 दिनों में तैयार किया गया था। ये सुरंगें हावड़ा ब्रिज से करीब 350 मीटर नीचे की ओर स्थित हैं। वहीं, करीब 30 मीटर गहराई पर बना हावड़ा मेट्रो स्टेशन भी महत्वपूर्ण उपलब्धि है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जून 2026 में अगले चार-पांच वर्षों में कोलकाता मेट्रो नेटवर्क में 60 नई पीढ़ी की मेट्रो रेक शामिल करने की घोषणा की थी। वर्ष 2025-26 में मेट्रो ने 23.60 करोड़ यात्रियों को सेवा दी। आने वाले वर्षों में नेटवर्क के करीब 130 किमी तक विस्तार का अनुमान है। यात्रियों के लिए ‘आमार कोलकाता मेट्रो’ ऐप के जरिए ऑनलाइन और क्यूआर कोड आधारित टिकट, डिजिटल भुगतान तथा स्मार्ट कार्ड रिचार्ज जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।