कोलकाता : कोलकाता में पिछले 15-16 वर्षों में स्थायी आबादी में अपेक्षित वृद्धि नहीं होने के संकेत मिले हैं। जनगणना के पहले चरण यानी घर-घर जाकर इन्यूमरेशन का काम पूरा होने के बाद सामने आए प्रारंभिक आंकड़ों के मुताबिक शहर की आबादी करीब 45 लाख 20 हजार हो सकती है। 2011 की जनगणना में कोलकाता की आबादी 44 लाख 96 हजार 694 थी। यानी शुरुआती आंकड़ों के अनुसार करीब 25 हजार की ही बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, जनसंख्या की वास्तविक तस्वीर 2027 में जनगणना प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी।
इस चरण में कोलकाता में करीब 19 लाख 88 हजार 42 ‘सेंसस हाउस’ दर्ज किए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, कई लोगों ने शहर में फ्लैट या मकान खरीद रखे हैं, लेकिन वे स्थायी रूप से वहां नहीं रहते। कुछ परिवार शहर से आसपास के जिलों या उपनगरों में चले गए हैं, जबकि उनके पुराने मकान खाली पड़े हैं।
अधिकारियों के मुताबिक शहर के कई इलाकों में बुजुर्ग माता-पिता अकेले रहते हैं, जबकि उनके बच्चे नौकरी के सिलसिले में बाहर रहते हैं। वहीं, कई परिवार कोलकाता छोड़कर आसपास के जिलों में बस गए हैं। ऐसे मामलों में जनगणना के दौरान यह तय किया जा रहा है कि संबंधित व्यक्ति को किस स्थान की आबादी में शामिल किया जाए।
हालांकि, अधिकारियों के एक वर्ग का मानना है कि वास्तविक आबादी में करीब 10 फीसदी तक वृद्धि हो सकती है। उनके अनुसार, 2011 की जनगणना में कुछ आंकड़ों में त्रुटियां रही होंगी। हालिया एसआईआर के दौरान कोलकाता में करीब पांच लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने का भी हवाला दिया जा रहा है। इनमें से कुछ लोग स्थायी रूप से दूसरे स्थानों पर चले गए हैं।
फिलहाल जनगणना के पहले चरण में मकानों और परिवारों का विवरण दर्ज किया गया है। अगले चरण में व्यक्ति-वार गणना होगी। इसके बाद शहर की वास्तविक आबादी की तस्वीर स्पष्ट होगी। इसके अलावा बेघर, फुटपाथ पर रहने वाले और घुमंतू लोगों की संख्या भी अलग से दर्ज की जा रही है।