मेघा, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता: अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर इस बार आयुष मंत्रालय ने स्वास्थ्यवर्धक भारतीय खाद्य पदार्थों को बढ़ावा देने की पहल की है। इसी कड़ी में पश्चिम बंगाल की लोकप्रिय पारंपरिक खाद्य सामग्री झालमूड़ी को ‘आयुष आहार’ के विशेष मेन्यू में शामिल किया गया है। मंत्रालय का संदेश साफ है— “जंक फूड आउट, देसी झालमूड़ी इन।” योग दिवस के कार्यक्रम में प्रतिभागियों को झालमूड़ी के साथ ज्वार-बाजरे के बिस्कुट, नारियल पानी, केला और गुड़-मूंगफली की चिक्की परोसी जाएगी। यह विशेष मेन्यू स्वाद और पोषण दोनों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
स्वास्थ्य और पोषण पर जोर : विशेषज्ञों का मानना है कि स्वास्थ्यवर्धक भोजन का मतलब केवल महंगे विदेशी फल या तथाकथित ‘सुपरफूड’ नहीं होता। स्थानीय और आसानी से उपलब्ध खाद्य पदार्थों में भी पर्याप्त पोषण मौजूद होता है। आयुष मंत्रालय की यह पहल इसी सोच को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। मंत्रालय का उद्देश्य योग दिवस को केवल एक दिन के आयोजन तक सीमित न रखकर भारतीय खानपान की स्वस्थ और पारंपरिक संस्कृति को भी लोगों तक पहुंचाना है। इस वर्ष योग दिवस के आयोजन में पश्चिम बंगाल को विशेष महत्व दिया जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी और झालमूड़ी का पुराना संबंध : झालमूड़ी को लेकर चर्चा उस समय भी हुई थी जब विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान झारग्राम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथ में झालमूड़ी का पैकेट देखा गया था। इसके बाद से यह पारंपरिक बंगाली स्नैक राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया। सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी 20 जून को पश्चिम बंगाल दौरे पर आएंगे और 21 जून को योग दिवस कार्यक्रम में शामिल होंगे। संभावना है कि उन्हें भी ‘आयुष आहार’ के तहत झालमूड़ी सहित यह विशेष हेल्दी फूड कॉम्बो परोसा जा सकता है।
क्यों खास है यह ‘देसी एनर्जी कॉम्बो’?
आयुष मंत्रालय के अनुसार: झालमूड़ी में कैलोरी और फैट की मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है। गुड़ और मूंगफली की चिक्की से प्रोटीन और हेल्दी फैट मिलता है। केला शरीर को पोटैशियम प्रदान करता है।
नारियल पानी शरीर को हाइड्रेटेड रखने में मदद करता है। योगाभ्यास के बाद शरीर को हल्का, ऊर्जावान और सक्रिय बनाए रखने के लिए यह संयोजन उपयुक्त माना जा रहा है।
बंगाल का पारंपरिक स्वाद पहुंचेगा अंतरराष्ट्रीय मंच तक : मूड़ी, मूंगफली और गुड़ जैसे खाद्य पदार्थ लंबे समय से बंगाल के दैनिक खानपान का हिस्सा रहे हैं। अब यही पारंपरिक स्वाद और पोषण योग दिवस के माध्यम से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहा है। आयुष मंत्रालय की इस पहल को भारतीय खाद्य संस्कृति और स्थानीय पोषणयुक्त आहार को बढ़ावा देने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।