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हावड़ा की ‘रॉल्स रॉयस होली’: जब भगवान के रथ का रूप लेती है विंटेज कार

1884 में राजा राय बहादुर शिवबक्स बागला व उनके परिवार ने शुरू की थी आस्था की यात्रा Rudyard Kipling से खरीदी गयी रॉल्स रॉयस में निकाली जाती है भगवान की सवारी

मेघा, सन्मार्ग संवाददाता

हावड़ा : लट्ठमार, लड्डुमार और कपड़ा फाड़ होली के किस्से तो आपने खूब सुने होंगे, लेकिन क्या कभी ऐसी होली देखी है जिसमें लक्ष्मी नारायण भगवान की सवारी किसी रथ या पालकी पर नहीं, बल्कि 1921 मॉडल की विंटेज रॉल्स-रॉयस कार में निकलती हो? कोलकाता से सटे हावड़ा शहर में मनाया जाने वाला यह अनोखा उत्सव ‘रॉल्स रॉयस होली’ के नाम से प्रसिद्ध है।

परंपरा का इतिहास: 1884 से शुरू हुई आस्था की यात्रा : इस शोभायात्रा की सबसे बड़ी खासियत है 1921 मॉडल की Rolls-Royce Silver Ghost। श्री श्री ईश्वर सत्यनारायण जी एंड अनादर डिवोटिज ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी मधुसुदन बागला ने बताया कि इस परंपरा की शुरुआत 1884 में राय बहादुर शिवबक्स बागला ने की थी, जिन्हें ब्रिटेन की महारानी Queen Victoria द्वारा ‘राजा’ की उपाधि दी गई थी। कहा जाता है कि बर्मा से कोलकाता आते समय उन्हें कई बाधाओं का सामना करना पड़ा, लेकिन भगवान सत्यनारायण की कृपा से सभी संकट दूर हुए। आस्था स्वरूप उन्होंने भगवान की सवारी निकालने की परंपरा शुरू की। समय के साथ सवारी का स्वरूप बदला—पहले हाथों में, फिर पालकी में और अब विंटेज रॉल्स-रॉयस में भगवान की यात्रा निकलती है। यह कार कभी नोबेल पुरस्कार विजेता लेखक Rudyard Kipling की थी, जिन्हें उनकी प्रसिद्ध कृति The Jungle Book के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। बाद में यह कार वर्ष 1981 में बागला परिवार ने किपलिंग से यह कार खरीद ली थी। इसके बाद इस विंटेज कार को रथ में परिणत किया गया और इसमें ही भगवान की सवारी निकाली जाती है।

राजसी रथ में बदल जाती है रॉल्स रॉयस : यह विंटेज कार होली पर विशेष रूप से बाहर आती है। इसे फूलों और रंगों से सजाया जाता है, मानो वह किसी राजसी रथ में बदल जायेगी। इस वर्ष 2026 में यह ऐतिहासिक शोभायात्रा आगामी 26 फरवरी को पहले कोलकाता के सत्यनारायण मंदिर से निकलकर तुलापट्टी, रवींद्र सरणी, चितपुर, राजाकटरा, हावड़ा ब्रिज होते हुए मुखराम कानोड़िया रोड स्थित श्री श्री सत्यनारायण मंदिर पहुंचेगी। फिर वापस शोभायात्रा आगामी 1 मार्च (रविवार) को निकलेगी जो हावड़ा ब्रिज होते हुए राजाकटरा, सोनापट्टी, लोहापट्टी, बांसतल्ला, आड़ीबांसतल्ला, बड़तल्ला, कलाकार स्ट्रीट होते हुए सत्यनारायण मंदिर पहुंचेगीा। ‘रॉल्स रॉयस होली’ सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि हावड़ा की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है—जहां परंपरा और शाही विरासत मिलकर होली को एक अद्वितीय रूप देते हैं।


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