मेघा, सन्मार्ग संवाददाता
हावड़ा: हावड़ा जिला अस्पताल के मुख्य भवन के नीचे स्थित एक भूमिगत परिसर में नर्सिंग कॉलेज संचालित किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि करीब 5 वर्षों से राज्य स्वास्थ्य विभाग से मान्यता प्राप्त यह स्नातक स्तर का नर्सिंग कॉलेज बेहद अस्वास्थ्यकर और असुरक्षित माहौल में चल रहा है। करीब 120 सीटों वाले इस कॉलेज में पढ़ने वाली छात्राओं और शिक्षकों को गर्मी, बारिश, पानी की समस्या और वेंटिलेशन की कमी जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हावड़ा जिला अस्पताल के मुख्य भवन के नीचे करीब 10 हजार वर्गफुट के एक बड़े हॉल में कॉलेज चल रहा है। बताया जा रहा है कि हॉल की ऊंचाई महज करीब सात फीट है। हवा और रोशनी के लिए कुछ छोटी खिड़कियां हैं, लेकिन उनमें से अधिकांश खराब हालत में हैं। गर्म हवा बाहर निकालने के लिए लगाए गए कई एग्जॉस्ट फैन भी काम नहीं करते। इससे पूरा परिसर बंद और घुटनभरा महसूस होता है। बताया जाता है कि वहां पहले पुराने फर्नीचर और चिकित्सा उपकरण रखे जाते थे।
2021 में मिली थी 120 सीटों की मंजूरी
अस्पताल सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2021 में हावड़ा जिला अस्पताल को 120 सीटों वाले नर्सिंग कॉलेज की मंजूरी मिली थी। शुरुआत में दक्षिण हावड़ा स्टेट जनरल अस्पताल में कॉलेज के लिए जगह तय की गई थी, लेकिन तत्कालीन सरकार की ओर से धन आवंटित नहीं होने के कारण वहां कॉलेज शुरू नहीं हो सका। इसके बाद सवाल उठ रहा है कि इतनी बंद और भूमिगत जगह में नर्सिंग कॉलेज चलाने की अनुमति आखिर कैसे मिली।
आग लगने पर बढ़ सकता है बड़ा खतरा
कॉलेज के मौजूदा परिसर को लेकर सबसे गंभीर सवाल सुरक्षा व्यवस्था पर उठ रहे हैं। आरोप है कि यहां कोई स्पष्ट अग्निशमन व्यवस्था नजर नहीं आती। आपात स्थिति में बाहर निकलने के लिए दो रास्ते बताए गए हैं, लेकिन इनमें से एक रास्ता बंद है। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, कुत्तों और असामाजिक तत्वों के प्रवेश को रोकने के लिए इस रास्ते को बंद किया गया है। ऐसे में आग या किसी अन्य आपात स्थिति में छात्राओं और कर्मचारियों के सुरक्षित बाहर निकलने को लेकर चिंता बढ़ गई है। बड़े हॉल के भीतर प्लाइवुड के बोर्ड लगाकर अलग-अलग कक्ष बनाए गए हैं। हालांकि, इन कमरों में पर्याप्त हवा के आवागमन की व्यवस्था नहीं होने की शिकायत है। कॉलेज की सह-प्राचार्य अन्वेषा भुक्ता ने भी स्थिति को लेकर चिंता जताई। उनका कहना है कि बंद परिसर में छात्राओं को पढ़ाना बेहद कठिन है।
शौचालय और पीने के पानी की भी परेशानी
तीसरे वर्ष की छात्राओं मेघा पाणिग्राही और सुमना नासरीन ने भी कॉलेज की व्यवस्थाओं को लेकर कई शिकायतें कीं। छात्राओं के मुताबिक, शौचालय इस्तेमाल करने के लिए उन्हें अस्पताल की दूसरी इमारत में जाना पड़ता है। पीने के पानी के लिए भी बाहर से पानी खरीदना पड़ता है। बारिश के दौरान जब परिसर में पानी भर जाता है, तब भी उसी स्थिति में कक्षाएं चलती रहती हैं।
नए क्रिटिकल केयर ब्लॉक में शिफ्ट करने की तैयारी
कॉलेज की प्राचार्य तमादे के अनुसार, मौजूदा स्थिति से निजात दिलाने के लिए अस्पताल के अधीक्षक को कई बार जानकारी दी गई है। इसके बावजूद अभी तक कॉलेज के लिए कोई वैकल्पिक परिसर उपलब्ध नहीं कराया गया है। इस संबंध में राज्य स्वास्थ्य विभाग को भी जानकारी दी गई है। जिला स्वास्थ्य विभाग ने हावड़ा अस्पताल में बने नए 100 बेड वाले क्रिटिकल केयर ब्लॉक (CCB) की ऊपरी मंजिल पर नर्सिंग कॉलेज को स्थानांतरित करने का प्रस्ताव भेजा है।