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बाल विवाह रोकथाम के लिए मंदिरों में पोस्टर

हुगली : बाल विवाह के मामलों में पश्चिम बंगाल के देश में शीर्ष पर होने के आंकड़े सामने आने के बाद राज्य सरकार ने इस सामाजिक कुरीति के खिलाफ सख्ती शुरू कर दी है। कभी सामाजिक सुधार की राह दिखाने वाले बंगाल में नाबालिग लड़कियों की शादी अब गंभीर समस्या बनती जा रही है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि हर हाल में बाल विवाह पर रोक लगानी होगी।

मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी है कि बाल विवाह कराने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। निर्धारित उम्र से पहले शादी करने वाले लोगों को सरकारी योजनाओं के लाभ से भी वंचित किया जा सकता है। भारत में बाल विवाह रोकने के लिए कानून लागू है। इसके तहत पुरुषों के लिए विवाह की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष निर्धारित है। इसके बावजूद आर्थिक और सामाजिक दबाव के कारण कई जगह मंदिरों तथा काजी के माध्यम से कम उम्र में विवाह कराए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं।

मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद अब मंदिर समितियां भी बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता अभियान में जुट गई हैं। चुंचुड़ा की सरत्सरणी स्थित एक काली मंदिर में बाल विवाह रोकने को लेकर बैनर लगाया गया है। बैनर पर स्पष्ट रूप से लिखा है— “उम्र के प्रमाण के बिना विवाह नहीं।”

मंदिर के पुरोहित ने भी साफ कर दिया है कि 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की का किसी भी परिस्थिति में विवाह नहीं कराया जाएगा। विवाह के लिए आधार कार्ड या उम्र का वैध प्रमाण दिखाना अनिवार्य होगा। मंदिर समिति के इस कदम से बाल विवाह रोकने के साथ-साथ लोगों में जागरूकता बढ़ाने की भी उम्मीद है।

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