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हिंदुस्तानी ही कभी ईरान से बंगाल तक भारत की संपर्क भाषा थी

कोलकाता: इंग्लैंड की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के हिंदी प्रोफेसर इमरे बंघा ने आज भारतीय भाषा परिषद में अपने विशेष व्याख्यान में कहा कि यह एक ग़लत प्रचार है कि हिंदी का निर्माण अंग्रेजों के काल में हुआ। हिंदी हिंदुस्तानी भाषा के रूप में 13वीं सदी से ही देश-विदेश के व्यापारियों तथा विभिन्न प्रदेश के लोगों के बीच संवाद की भाषा थी। मराठा शिवाजी ने औरंगज़ेब से बातचीत कि भाषा का प्रमाण दिया। इमरे बंघा हंगरी के हैं जो इन दिनों इंग्लैंड के ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में हिंदी के प्रोफ़ेसर हैं। वे भारतीय भाषा परिवार के विशेष आमंत्रण पर ‘हिंदुस्तानी भाषा : मिथक और नई खोज’ पर एक विशेष व्याख्यान दे रहे थे। उन्होंने अमीर खुसरों से भी पहले के और मुगल काल की हिन्दुस्तानी भाषा के कई उदाहरण दिए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेशों के हिसाब से हिंदुस्तानी भाषा में विविधता रही है। 18वीं सदी के बांग्ला लेखक भरत चंद्र राय ने भी हिंदुस्तानी में लिखा है। आरम्भ में प्रोफेसर बंघा का स्वागत करते हुए ईश्वरी प्रसाद टाँटिया ने कहा कि विदेशी होते हुए भी इमरे बंघा अद्भुत हिंदी शोधकर्ता और विद्वान हैं। उन्होंने विश्व भारती, शांतिनिकेतन से भी शिक्षा ग्रहण की है। रवीन्द्र भारती विश्वविद्यालय के प्रो. हितेंद्र पटेल ने कहा कि हिंदी को 19 वीं सदी के अंग्रेजी राज की देन कहने का विरोध होना चाहिए। अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए वरिष्ठ लेखक डॉ. शंभुनाथ ने कहा कि अवधी, ब्रज, राजस्थानी, भोजपुरी, मैथिली आदि भाषाएँ यदि हिंदी की आत्मा हैं तो हिंदुस्तानी खड़ी बोली हिंदी की काया है। गांधी और प्रेमचंद हिंदुस्तानी भाषा के पक्ष में थे, पर 1947 में देश विभाजन के साथ उसका इतिहास स्थगित हो गया। फिर भी लगभग 700 सालों तक हिंदुस्तानी एक भाषा के रूप में थी, पर अंग्रेजी ने उसका हक छीन लिया। कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ संजय जायसवाल ने कहा हिंदुस्तानी भाषा ने भारत में सामासिक संस्कृति और साहित्य को विस्तार दिया। ईस्ट इंडिया कंपनी से पूर्व हिंदुस्तानी भाषा की जमीन तैयार हो गई थी। हिंदुस्तानी उस समय भारत में वैसे ही प्रचलित थी जैसे यूरोप में लैटिन।इस अवसर पर श्रीरामनिवास द्विवेदी, आशीष झुनझुनवाला, महेश जायसवाल, प्रियंकर पालीवाल, प्रो.वेदरमण पांडेय, अभिज्ञात, जीतेंद्र जीतांशु, सुषमा कुमारी, डॉ आदित्य गिरी, राहुल गौड़, संजय दास, सुरेश शा, डॉ पूजा शुक्ला, डॉ प्रियंका सिंह, डॉ संजय राय, डॉ रमाशंकर सिंह, प्रमोद कुमार, नमिता जैन, डॉ सुमिता गुप्ता, डॉ शिव प्रकाश दास, सुशील पांडेय,प्रिया गुप्ता,सत्यम पांडेय, अंजलि साव, वंदना जैन, प्रदीप धानुक, अजय पोद्दार, नैना प्रसाद, सुब्बू तबस्सुम, नेहा कुमारी साव, संजना जायसवाल, अपराजिता, अनिल साह, सुकन्या तिवारी, इशरत जहां सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी उपस्थित थे।

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