जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : हाई कोर्ट के जस्टिस उदय कुमार ने एक मामले में फैसला सुनाते हुए कहा है कि पत्नी गुजारा भत्ता पाने का हकदार है। तलाक होने के बावजूद वह इसके लिए दावा कर सकती है। जस्टिस कुमार ने कहा है कि बालिग बेटी को यह अधिकार नहीं है।
यह मामला हावड़ा के उलूबेड़िया के पति पत्नी का है। ब्याह के बाद तकरार शुरू हो गया और अंत में तलाक हो गया। इसके बाद पत्नी ने गुजारा भत्ता के लिए मामल दायर कर दिया। पत्नी ने अपने लिए दो हजार और बेटी के लिए 1500 रुपए दिए जाने की मांग की थी। पति ने इसके खिलाफ हाई कोर्ट में मामला दायर कर दिया। जस्टिस उदय कुमार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि स्त्री शब्द के अंदर पत्नी भी शामिल है। तलाक होने के बाद भी यह पति की जिम्मेदारी बनती है कि वह गुजारा भत्ता के लिए भुगतान करें। जब तक कि वह दूसरा ब्याह नहीं कर लेती है। जस्टिस कुमार ने अपने फैसले में कहा है कि बेटी बालिग हो चुकी है इसलिए वह गुजारा भत्ता के लिए दावा नहीं कर सकतो है। अलबत्ता वह इंडियन हिंदू एडॉप्शन एंड मेंटिनेस एक्ट के तहत सिविल अदालत में गुजारा भत्ता के लिए मामला दायर कर सकती है। पेटीशनर समर पाल हावड़ा के उलूबेड़िया का रहने वाला है। हाई कोर्ट ने पेटीशनर की आर्थिक स्थिति का आकलन करने की जिम्मेदारी ट्रायल कोर्ट पर ही छोड़ दिया है। इसके साथ ही कहा है कि अगर वह बकाये का 50 फीसदी भुगतान करता है तो उसके खिलाफ जारी डिस्ट्रेस वारंट पर रोक लगाई जा सकती है।