हाई कोर्ट के डिवीजन बेंच ने दिया आदेश
करीब 13 साल तक करना पड़ा संघर्ष
जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : राज्य सरकार को हावड़ा के पूर्व ओसी को ब्याज के साथ ग्रेच्युटी का भुगतान करना पड़ेगा। इसके लिए उन्हें करीब 13 वर्षों तक संघर्ष करना पड़ा है। एक आपराधिक मामला दर्ज होने का हवाला देते हुए ग्रेच्युटी की भुगतान रोक दी गई थी। जस्टिस माधुरेश प्रसाद के डिवीजन बेंच ने ब्याज के साथ ग्रेच्युटी का भुगतान किए जाने का आदेश दिया है। एडवोकेट आशीष कुमार चौधरी बताते हैं की उम्र के अंतिम पड़ाव में और बीमारी के कारण जर्जर हो गए पूर्व ओसी प्रणव दत्त को इस फैसले से काफी राहत मिली है। वे सोदपुर के रहने वाले हैं और 1978 में पुलिस फोर्स में ज्वाइन किया था। उन्हें सन 2000 के अगस्त में हावड़ा थाने के ओसी के पद पर नियुक्त किया गया था। उसी साल अगस्त में ही लॉकअप से एक अभियुक्त लापता हो गया था। डीजीपी ने इस मामले की विभागीय जांच की जाने का आदेश दिया था। इसी दौरान लापता अभियुक्त के परिवार के लोगों ने थाने में एफआईआर दर्ज करा दी। इसके बाद अदालत में मामला दायर हो गया और पूर्व ओसी को निलंबित कर दिया गया। इस अवधि के दौरान वे सेवानिवृत्त हो गए और मामला चलता रहा। सेवानिवृत्त होने के बाद उनके अन्य भुगतान तो कर दिए गएं पर ग्रेच्युटी रोक दी गई। इसके खिलाफ उन्होंने 2013 में हाई कोर्ट में मामला दायर किया था। एडवोकेट आशीष चौधरी की दलील थी कि ग्रेच्युटी या पेंशन कोई सरकारी अनुदान नहीं है। यह कर्मचारी के वेतन का एक हिस्सा है जो बर्षों जमा करने के बाद सेवानिवृत्त होने के समय मिलता है। इसलिए इसे रोका नहीं जा सकता है। जस्टिस मधुरेश प्रसाद के डिवीजन बेंच ने एडवोकेट चौधरी की दलील से सहमति जताते हुए ब्याज के साथ ग्रेच्युटी का भुगतान किए जाने का आदेश दिया है।