कोलकाता : ट्रेन संचालन और यात्री सुरक्षा को बड़ी मजबूती प्रदान करते हुए पूर्व रेलवे ने पानागढ़ स्टेशन की सिग्नलिंग प्रणाली को सफलतापूर्वक अपग्रेड किया है। पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक मिलिंद देउस्कर के नेतृत्व तथा आसनसोल मंडल के मंडल रेल प्रबंधक संग्रह मौर्य के मार्गदर्शन में स्टेशन को अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली में परिवर्तित किया गया है। यह विशाल तकनीकी विकास बुधवार को शाम 5:25 बजे सिग्नल एवं दूरसंचार (ओपनलाइन) विभाग द्वारा सफलतापूर्वक चालू किया गया। इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली रेलवे स्टेशन के लिए एक डिजिटल मस्तिष्क की तरह कार्य करती है, जो कंप्यूटर माइक्रोप्रोसेसर के माध्यम से ट्रेनों, पटरियों और सिग्नलों की आवाजाही को सुरक्षित रूप से नियंत्रित करती है। पुरानी यांत्रिक प्रणाली को बदलते हुए यह नयी व्यवस्था मानवीय त्रुटियों को समाप्त करती है, ट्रेनों को परस्पर विरोधी मार्ग मिलने से रोकती है तथा संचालन को अत्यधिक तेज और कुशल बनाती है। इस डिजिटल प्रणाली के साथ-साथ दो महत्वपूर्ण समपार फाटक गेट संख्या 102/एसपीएल/टी एवं 103/एसपीएल/टी को भारी, हाथ से संचालित मैकेनिकल लिफ्टिंग बैरियर से आधुनिक एवं सहज इलेक्ट्रिकल लिफ्टिंग बैरियर में अपग्रेड किया गया है। वहीं निकटवर्ती गेट संख्या 104/सी/टी को स्थायी रूप से हटाकर रेल एवं सड़क यातायात को और अधिक सुचारु बनाया गया है। दैनिक यात्रियों और स्थानीय निवासियों के लिए यह उन्नयन बड़ी राहत लेकर आया है। पानागढ़ सैन्य गतिविधियों तथा मैटिक्स फर्टिलाइजर्स और न्यूविस्टास कॉर्पोरेशन लिमिटेड जैसी भारी उद्योग इकाइयों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र है। पहले मालगाड़ियों को ट्रैक बदलने के लिए जटिल एवं समय लेने वाली शंटिंग प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था, जिससे घंटों की बर्बादी होती थी। नयी प्रणाली में लचीले कॉमन लूप बनाए गए हैं, जिनसे ट्रेनें दोनों दिशाओं में सहजता से संचालित हो सकेंगी। इससे प्रत्येक ट्रेन मूवमेंट में लगभग तीन घंटे की बचत होगी, अत्यधिक व्यस्त खाना–अंडाल खंड पर भीड़भाड़ कम होगी तथा सैन्य विशेष ट्रेनों का संचालन बिना विलंब के संभव हो सकेगा।
यह तकनीकी उन्नयन तीन महत्वपूर्ण नियंत्रण कक्षों — सेंट्रल केबिन, ईस्ट हट एवं वेस्ट हट — में विस्तारित किया गया है। उन्नत नेटवर्क में कुल 147 सुरक्षित ट्रेन मार्ग और 62 आधुनिक सिग्नल शामिल हैं, जिनमें मुख्य सिग्नल, शंट सिग्नल तथा आपातकालीन कॉलिंग-ऑन सिग्नल शामिल हैं, जो लोको पायलटों का मार्गदर्शन करेंगे। ट्रेनों की स्थिति का स्वतः पता लगाने के लिए 106 ट्रैक सेक्शनों में फ्राउशर निर्मित 143 मल्टी-सेक्शन डिजिटल एक्सल काउंटर डिटेक्शन पॉइंट लगाए गए हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि अगली ट्रेन के प्रवेश से पहले ट्रैक पूरी तरह खाली हो। इसके अतिरिक्त, 24 ट्रैक प्वाइंट अब 42 आधुनिक प्वाइंट मशीनों द्वारा संचालित किए जा रहे हैं, जिससे ट्रैक परिवर्तन निर्बाध रूप से संभव हो सकेगा। संपूर्ण लेआउट को तीन इंटीग्रेटेड पावर सप्लाई, तीन अर्थ लीकेज डिटेक्टर, डिजिटल डाटालॉगर तथा तीन स्वचालित फायर अलार्म सिस्टम जैसी उन्नत सुरक्षा सुविधाओं से संरक्षित किया गया है। विशेष रूप से इस लेआउट में भारत की स्वदेशी ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन प्रणाली ‘कवच’ के सफल संशोधन भी शामिल किए गए हैं, जो ट्रेन टक्करों को रोकने में सहायक होंगे।
इस उपलब्धि के महत्व पर प्रकाश डालते हुए पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिवराम माझी ने कहा, “पानागढ़ में इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली का सफल कमीशनिंग पूर्व रेलवे की सुरक्षा और आधुनिक अवसंरचना के प्रति प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण है। ट्रेन शंटिंग में तीन घंटे की बचत और समपार फाटकों को इलेक्ट्रिकल प्रणाली में उन्नत करने के माध्यम से हम न केवल उद्योगों और सैन्य संचालन की क्षमता बढ़ा रहे हैं, बल्कि स्थानीय सड़क यात्रियों के दैनिक जीवन को भी प्रत्यक्ष रूप से बेहतर बना रहे हैं। हमारे समर्पित सिग्नल एवं दूरसंचार दल द्वारा सफलतापूर्वक निष्पादित यह महत्त्वपूर्ण कार्य भारतीय रेल को और अधिक सुरक्षित, तेज तथा कुशल बनाने की दिशा में एक और मील का पत्थर है।”