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डानकुनी से सूरत : बंगाल का ‘गोल्डन कॉरिडोर’, वैश्विक समृद्धि की नयी राह

बंगाल के लिए ऐतिहासिक बजट, डानकुनी–सूरत डीएफसी बना ‘ब्रिज ऑफ प्रॉस्पेरिटी’ 14,205 करोड़ रुपये का बूस्टर, बंगाल के लिए गेमचेंजर प्रोजेक्ट फ्रेट कॉरिडोर से बदलेगा बंगाल का भविष्य, आधे समय में पहुंचेगा माल

मेघा, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा घोषित रिकॉर्ड 14,205 करोड़ रुपये के आवंटन ने बंगाल के विकास को नयी गति दी है। इस बजट का सबसे महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रोजेक्ट है डानकुनी–सूरत डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC)। यह केवल एक नयी रेल लाइन नहीं, बल्कि बंगाल के खेतों, कारखानों और कारीगरों को गुजरात के उद्योग और वैश्विक बाजारों से जोड़ने वाला ‘ब्रिज ऑफ प्रॉस्पेरिटी’ है।

प्रधानमंत्री का विजन : बंगाल को वैश्विक व्यापार का केंद्र बनाना : यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस दूरदर्शी विजन का परिणाम है, जिसके तहत पश्चिम बंगाल को आधुनिक बुनियादी ढांचे और वैश्विक लॉजिस्टिक्स नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है। 6 राज्यों पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात से गुजरने वाला यह फ्रेट कॉरिडोर बंगाल के औद्योगिक हृदय को सीधे सूरत जैसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार केंद्र से जोड़ेगा।

लॉजिस्टिक्स में क्रांति : आधे समय में पहुंचेगा माल : वर्तमान में कोलकाता से सूरत तक मालगाड़ी को 1,850–1,900 किलोमीटर का सफर तय करने में 30 से 33 घंटे लगते हैं। यात्री ट्रेनों के दबाव के कारण मालगाड़ियों को अक्सर इंतजार करना पड़ता है।

डानकुनी–सूरत डीएफसी के शुरू होने से

* माल परिवहन का समय लगभग आधा हो जाएगा

* भारी और तेज रफ्तार मालगाड़ियां बिना रुकावट चलेंगी

* टाइम इज मनी का सिद्धांत बंगाल के उद्योगों के लिए साकार होगा

स्थानीय कारीगरों से वैश्विक बाजार तक : बंगाल खासकर परिधान और हस्तशिल्प के क्षेत्र में देश का बड़ा केंद्र है। अब तक बाजार की सीमाओं और धीमी कनेक्टिविटी के कारण स्थानीय निर्माता राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान नहीं बना पा रहे थे।

डीएफसी से मिलने वाले बड़े फायदे

* टेक्सटाइल सिनर्जी : कोलकाता के परिधान निर्माता सीधे सूरत के विशाल टेक्सटाइल और एक्सपोर्ट नेटवर्क से जुड़ेंगे।

* डायमंड और ज्वेलरी कनेक्शन : सूरत की विश्व प्रसिद्ध हीरा-आभूषण इंडस्ट्री से बंगाल के कारीगरों को नये अवसर मिलेंगे।

* कृषि सोना : आम, सब्जियां और अन्य नाशवान उत्पाद ताजगी के साथ पश्चिम भारत तक पहुंचेंगे, जिससे किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे।

डानकुनी बनेगा वैश्विक लॉजिस्टिक्स हब : इस कॉरिडोर के चलते डानकुनी एक अंतरराष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स हब के रूप में उभरेगा।

* विदेशी निवेश को बढ़ावा

* युवाओं के लिए हजारों नयी नौकरियां

* यात्री ट्रेनों की समयबद्धता में सुधार

* ‘सोनार बांग्ला’ की ओर तेज रफ्तार

डानकुनी–सूरत डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर केवल माल ढोने की परियोजना नहीं है, बल्कि पश्चिम बंगाल को विश्वस्तरीय औद्योगिक राज्य बनाने की दिशा में सबसे बड़ा कदम है। यह कॉरिडोर बंगाल को एक गेटवे में बदल देगा, जहां से राज्य की मेहनत, विरासत और उत्पाद पूरी दुनिया तक पहुंचेंगे। यह परियोजना विकास, गरिमा और समृद्धि का स्थायी वादा है—एक ऐसा वादा, जो आने वाले दशकों तक पश्चिम बंगाल की प्रगति की धड़कन बना रहेगा।


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