मेघा, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता/दक्षिण 24 परगना : अपराध की दुनिया में 'टिप' का अपना ही महत्व है। साल 2006 के विधानसभा चुनाव अभी खत्म ही हुए थे कि 26 मई की दोपहर दक्षिण 24 परगना के रायदीघी थाना अंतर्गत काशीनगर को-ऑपरेटिव बैंक में दिनदहाड़े डकैती की घटना ने पुलिस प्रशासन की नींद हराम कर दी।
डकैती और पुलिस की चुनौती : बैंक लूटने वाले कोई शौकिया अपराधी नहीं, बल्कि पेशेवर गिरोह था। कुल 12 लोगों ने इस वारदात को अंजाम दिया था। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए 6 लोगों को तो पकड़ लिया, लेकिन बाकी 6 अब भी फरार थे। कानूनी पेच यह था कि जब तक सभी आरोपित गिरफ्तार नहीं होते, तब तक ट्रायल शुरू नहीं हो सकता था। फरार आरोपितों के खिलाफ 'हुलिया' (उद्घोषणा) जारी की गई और पुलिस उनकी तलाश में जुट गई।
वह 'टिप' जिसने बदला खेल : आईपीएस सुखेन्दु हीरा, जो उस समय बारुईपुर के एसडीपीओ थे, को जांच के दौरान पता चला कि फरार आरोपितों में से दो राजेश मोल्ला और मोजाफ्फर लस्कर स्थानीय इलाकों में ही छिपे हैं। राजेश सालपुर और मोजाफ्फर छात्रा गांव का निवासी था। मोजाफ्फर के बारे में सूचना थी कि वह राजनीतिक रसूख वाले एक नेता का करीबी है, जिससे उसे पकड़ना और भी चुनौतीपूर्ण था।
ऑपरेशन 'सैलून' और राजेश की गिरफ्तारी : पुलिस को सूचना मिली कि राजेश गोआलबेड़िया हाट के एक सैलून में अक्सर अड्डा जमाने आता है। पुलिस टीम ने जाल बिछाया। जैसे ही राजेश सैलून में घुसा, सादे कपड़ों में तैनात पुलिसकर्मियों ने उसे घेर लिया। राजेश ने ब्लेड दिखाकर डराने की कोशिश की, लेकिन पुलिस की पिस्तौल के आगे उसे घुटने टेकने पड़े।
मोजाफ्फर की फिल्मी फरारी और 'कीचड़' में अंत : राजेश की गिरफ्तारी के बाद मोजाफ्फर को पकड़ना पुलिस का मुख्य लक्ष्य था। वह बहुत चालाक था और मुख्य सड़कों पर कम ही आता था। पुलिस को खबर मिली कि वह देवानगंज कनाल के पास एक अवैध शराब के अड्डे पर आता है। एक शाम, जब इलाके में 'अनल-काकली' जात्रा (लोक नाटक) का आयोजन था, मोजाफ्फर अपने साथियों के साथ शराब के अड्डे पर मौजूद था। पुलिस को देखते ही वह अंधेरे का फायदा उठाकर खेतों की ओर भागा। खेतों में बोरो धान की बुवाई के कारण घुटनों तक कीचड़ और पानी था। लगभग 500 मीटर की उस 'फिल्मी दौड़' में पुलिसकर्मी हरि ने अपना जूता तक गंवा दिया, लेकिन मोजाफ्फर को नहीं छोड़ा। अंततः कीचड़ से लथपथ मोजाफ्फर को पुलिस ने दबोच लिया।
न्याय की जीत : इन दोनों की गिरफ्तारी के साथ ही रायदीघी बैंक डकैती केस की कड़ियाँ जुड़ गईं। मोजाफ्फर और राजेश की गिरफ्तारी ने न केवल पुलिस का मनोबल बढ़ाया, बल्कि यह भी साबित किया कि अपराधी चाहे कितना भी रसूखदार क्यों न हो, कानून के लंबे हाथों से नहीं बच सकता।