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रंग, राहत और जिम्मेदारी: होली की भीड़ से निपटने में पूर्व रेलवे का मानवीय स्पर्श

कोलकाता :

होली पर घर पहुंचने की जद्दोजहद आमतौर पर भीड़, अफरा-तफरी और वेटिंग टिकट की चिंता से भरी होती है। लेकिन इस बार तस्वीर कुछ बदली-बदली नजर आ रही है।

पटना अपने पैतृक घर जाने की तैयारी कर रहे यात्री रिहान सिंह कहते हैं, “मैंने सोचा भी नहीं था कि अनारक्षित यात्रा इतनी सम्मानजनक हो सकती है। स्टेशन में प्रवेश करते ही 24 घंटे तैनात आरपीएफ और रेलवे कर्मचारियों के स्पष्ट मार्गदर्शन से लगा कि रेलवे ने इस बार ठोस योजना बनाई है।”

होली के मद्देनजर Eastern Railway ने व्यापक तैयारियां की हैं। 27 फरवरी 2026 से अब तक 15 होली स्पेशल ट्रेनों का संचालन शुरू किया गया है, ताकि Howrah, Sealdah, Kolkata, Asansol और Malda जैसे प्रमुख स्टेशनों पर भीड़ को व्यवस्थित ढंग से संभाला जा सके।

आंकड़ों में तैयारी की तस्वीर

वेटिंग टिकट की समस्या को कम करने के लिए 66,000 अतिरिक्त बर्थ उपलब्ध कराए गए हैं। प्रथम एसी (1A) और द्वितीय एसी (2A) से लेकर स्लीपर और जनरल श्रेणी तक सभी वर्गों में कोचों की संख्या बढ़ाई गई है।

15 विशेष ट्रेनों का विभाजन इस प्रकार है:

  • सियालदह मंडल: 6 ट्रेनें

  • हावड़ा मंडल: 5 ट्रेनें

  • मालदा और आसनसोल मंडल: 2-2 ट्रेनें

सुरक्षा और स्वच्छता पर विशेष जोर

स्टेशनों पर इस बार अव्यवस्था के बजाय अनुशासन और व्यवस्था का माहौल देखने को मिल रहा है। प्रयागराज जाने वाले यात्री राजेश शाह ने बताया, “टॉयलेट साफ हैं, पानी की सुविधा सुचारु है और होल्डिंग एरिया इतने व्यवस्थित हैं कि भगदड़ जैसी स्थिति नहीं बन रही। रेलवे कर्मचारी दिन-रात मेहनत कर रहे हैं।”

अनारक्षित स्पेशल ट्रेन से यात्रा कर रहे अनिल कुमार जायसवाल ने कहा, “आमतौर पर होली में अनारक्षित यात्रा किसी जंग से कम नहीं होती। लेकिन इस बार आरपीएफ की लगातार गश्त और अतिरिक्त ट्रेनों में सीट उपलब्धता से सफर काफी आसान हो गया है।”

दिलों को जोड़ती विशेष ट्रेनें

इन होली स्पेशल ट्रेनों को रणनीतिक रूप से ऐसे रूट पर चलाया गया है जो बंगाल को देश के हृदयस्थल से जोड़ते हैं। इनमें रक्सौल, मधुबनी, गोरखपुर, खाटीपुरा, आनंद विहार टर्मिनल, मलातिपुर, न्यू जलपाईगुड़ी, उधना और पटना जैसे प्रमुख गंतव्य शामिल हैं।

पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी श्री शिबराम माझी ने कहा कि होली के भावनात्मक महत्व को ध्यान में रखते हुए ये कदम उठाए गए हैं। उनका कहना है कि ट्रेनों का संचालन केवल संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वच्छता, सुरक्षा और यात्री-सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।

जब होली स्पेशल ट्रेनें प्लेटफॉर्म से रवाना हो रही हैं, तो वे केवल यात्रियों को ही नहीं, बल्कि सुरक्षित और सुकून भरे पुनर्मिलन का भरोसा भी साथ लेकर जा रही हैं — पूर्व रेलवे की चौबीसों घंटे की निगरानी और समर्पित प्रयासों के साथ।

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