कोलकाता : राज्य में बच्चों के बीच रेस्पिरेटरी सिंसिशियल वायरस (आरएस वायरस) का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ने से अभिभावकों में चिंता बढ़ गई है, जबकि डॉक्टर सतर्कता और समय पर इलाज को बेहद जरूरी बता रहे हैं।
पीयरलेस अस्पताल की कंसल्टेंट पेडियाट्रिशियन पीकू इन-चार्ज डॉ. सहेली दासगुप्ता ने बताया कि काफी बच्चे सर्दी, खांसी और बुखार से संक्रमित होकर अस्पताल में आ रहे हैं। इसके साथ ही सांस की तकलीफ भी बच्चाें में हो रही है। काफी बच्चे पीकू और वार्ड में भर्ती हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि हर साल इस समय बच्चों में कई तरह के वायरस मिलते हैं। इस बार आरएसवी संक्रमित बच्चों की संख्या अधिक हो रही है। इनफ्लुएंजा, मेटिनोवायरस के मामले भी आ रहे हैं। कई मामलों में सांस लेने में तकलीफ बढ़ जाने पर वेंटिलेशन देने की आवश्यकता हो रही है। अधिकतर बच्चों के टेस्ट में आरएसवी मिल रहा है। इसके अलावा ह्यूमन मेटिनोवायरस संक्रमण भी बच्चों में पाया जा रहा है।
तुरंत एसी से नॉन एसी में ना जायें
वुडलैंड्स अस्पताल के कंसल्टेंट पेडियाट्रिक्स डॉ. क्रुष्णा चंद्र दास ने कहा, ‘हर साल की तुलना में इस बार मौसम में काफी अधिक उतार-चढ़ाव हो रहा है जिस कारण आरएस वायरस के मामले अधिक बढ़े हैं। शून्य से लेकर 10 साल तक की उम्र के बच्चों में यह अधिक हो रहा है। अचानक एसी से नॉन एसी में जाने के कारण भी यह वायरस अधिक फैल रहा है।’
प्रमुख लक्षण
तेज बुखार, लगातार खाँसी, सांस लेने में कठिनाई / सीटी जैसी आवाज, भूख कम लगना, सुस्ती या चिड़चिड़ापन।
बचाव के उपाय
बच्चे को भीड़-भाड़ से दूर रखें, साफ-सफाई और हाथ धोने की आदत, खांसते-छींकते समय मास्क/रुमाल का उपयोग, बीमार बच्चों से दूरी बनाना, डॉक्टर की सलाह पर ही दवा दें।
कब तुरंत डॉक्टर को दिखाएँ?
सांस लेने में तेज़ी/दिक्कत, होंठ या चेहरा नीला पड़ना, बच्चा दूध/खाना बिल्कुल न लेना।