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टिकट खरीदना सस्ता, बिना टिकट यात्रा महंगा: पूर्व रेलवे की अपील

मेघा, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : Eastern Railway ने यात्रियों से एक बार फिर अपील की है कि वे बिना टिकट यात्रा की प्रवृत्ति को त्यागकर “गरिमा के साथ यात्रा” (Journey with Dignity) का संकल्प लें। रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया कि भारतीय रेल केवल एक सरकारी संस्था नहीं, बल्कि देश के हर नागरिक की सामूहिक संपत्ति है, जिसकी सुरक्षा और विकास यात्रियों की ईमानदारी पर निर्भर करता है।

सेवा के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी : पूर्व रेलवे ने कहा कि टिकट खरीदना केवल कानूनी दायित्व नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी भी है। देश में रेल यात्रा आज भी सबसे सस्ता परिवहन माध्यम है। उदाहरण के तौर पर सियालदह से खड़दह (19 किमी) का किराया मात्र 5 रुपये है, जबकि सियालदह–नैहाटी (38 किमी) और हावड़ा–बंडेल (40 किमी) का किराया केवल 10 रुपये है। इतनी कम दर पर इतनी लंबी दूरी तय करने की सुविधा अन्य किसी परिवहन माध्यम में उपलब्ध नहीं है। रेल प्रशासन ने कहा कि बिना टिकट यात्रा न केवल दंडनीय अपराध है, बल्कि यह यात्री की आत्मसम्मान को भी ठेस पहुंचाता है। इसलिए सभी से टिकट खरीदकर सम्मानपूर्वक यात्रा करने की अपील की गई है।

मासिक टिकट सस्ता, जुर्माना महंगा : प्रशासन ने आंकड़ों के जरिए समझाया कि नियमित यात्री के लिए मासिक सीजन टिकट (MST) लेना अधिक लाभकारी है। सियालदह–नैहाटी या हावड़ा–बंडेल सेक्शन के लिए मासिक सीजन टिकट की कीमत केवल 185 रुपये है, जिससे पूरे महीने असीमित यात्रा की जा सकती है। इसके विपरीत, यदि कोई यात्री बिना टिकट पकड़ा जाता है तो उसे न्यूनतम 260 रुपये (किराया व जुर्माना सहित) का दंड देना पड़ता है। यानी एक बार की गलती का जुर्माना पूरे महीने के वैध सफर से भी अधिक है।

डिजिटल सुविधाएं: कतार से मुक्ति : यात्रियों की सुविधा के लिए रेलवे ने टिकट खरीद प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और सरल बनाया है। UTS ऐप और Rail One ऐप के माध्यम से यात्री मोबाइल पर कभी भी टिकट बुक कर सकते हैं। Rail One ऐप पर अतिरिक्त छूट की भी सुविधा है। स्टेशनों पर ऑटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीन (ATVM) भी उपलब्ध हैं, जिससे तुरंत टिकट प्राप्त किया जा सकता है।

तीन महीने में 3.30 लाख दंड मामले : इसके बावजूद स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। पिछले तीन महीनों में पूर्व रेलवे ने 3,30,451 बिना टिकट यात्रा के मामले दर्ज किए हैं। प्रशासन ने इसे राजस्व का स्रोत नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता की कमी का संकेत बताया है। पूर्व रेलवे ने कहा कि यात्रियों के सहयोग के बिना सुरक्षित, सस्ती और आधुनिक रेल सेवा संभव नहीं है। टिकट खरीदकर यात्रा करने से न केवल ट्रैक और कोचों के आधुनिकीकरण में योगदान मिलता है, बल्कि यह राष्ट्र की संपत्ति के प्रति सम्मान भी दर्शाता है।


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