मेघा, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किये गये आम बजट में देश की सुरक्षा और कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाली एक अहम घोषणा की गयी है। बजट में वाराणसी से सिलीगुड़ी तक हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा की गयी है, जिसके तहत अब लगभग 15 घंटे का सफर महज 3 घंटे में पूरा किया जा सकेगा। इस हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को देश की सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सिलीगुड़ी क्षेत्र में स्थित चिकन नेक कॉरिडोर, जो पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है, इस परियोजना से और अधिक सशक्त होगा। युद्ध या आपात स्थिति में सेना और सुरक्षा बलों की त्वरित आवाजाही सुनिश्चित करने में यह रेल कॉरिडोर निर्णायक भूमिका निभाएगा। बजट में रेलवे के लिए पूंजीगत व्यय बढ़ाये जाने से संकेत मिलते हैं कि इस परियोजना को तेजी से जमीन पर उतारा जाएगा। इसके तहत नयी रेल लाइनों का निर्माण, ट्रैक डबलिंग-ट्रिपलिंग, पूर्ण विद्युतीकरण, अत्याधुनिक सिग्नल प्रणाली और विश्वस्तरीय स्टेशनों का विकास किया जाएगा। हाई-स्पीड ट्रेनों को लगभग 250 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलाने की योजना है। इस रेल कॉरिडोर के शुरू होने से दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के प्रमुख शहर आपस में तेज और आधुनिक रेल नेटवर्क से जुड़ेंगे। इससे न केवल यात्रा समय घटेगा, बल्कि यात्री सुविधाओं में भी बड़ा सुधार होगा। वाराणसी, प्रयागराज, पटना और सिलीगुड़ी जैसे धार्मिक, शैक्षिक और व्यावसायिक केंद्रों तक पहुंच और अधिक आसान हो जाएगी। वाराणसी के लिए यह परियोजना विशेष रूप से लाभकारी मानी जा रही है। बजट में पर्यटन, विरासत संरक्षण और ओडीओपी (वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट) को बढ़ावा देने की घोषणाओं के साथ यह रेल कॉरिडोर काशी के उद्योग, व्यापार और पर्यटन को नयी गति देगा। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नये अवसर भी सृजित होंगे। वहीं, पूर्वोत्तर भारत का प्रवेश द्वार सिलीगुड़ी इस परियोजना से और अधिक सशक्त होगा। चाय उद्योग, सीमावर्ती व्यापार और पर्यटन को सीधा लाभ मिलेगा। साथ ही, बजट में घोषित मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक पार्क और फ्रेट टर्मिनल से इस रूट पर माल ढुलाई सस्ती और तेज हो जाएगी। कुल मिलाकर, केंद्रीय बजट के सहयोग से प्रस्तावित दिल्ली–वाराणसी–सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर न केवल देश की आर्थिक प्रगति को गति देगा, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, क्षेत्रीय संतुलन और सामाजिक-सांस्कृतिक संपर्क को भी मजबूत करेगा। यह परियोजना समग्र विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकती है।