सन्मार्ग संवाददाता
हावड़ा : हावड़ा ग्रामीण के बेनापुर पर्यटन केंद्र पर गहराता संकट अब साफ दिखाई देने लगा है। रूपनारायण नदी के किनारे बसे इस मनोहर पर्यटन स्थल के नदी में विलीन हो जाने की आशंका जताई जा रही है। कुछ दिन पहले तक जहां शीतकाल, क्रिसमस, साल के अंत और नववर्ष के अवसर पर सैकड़ों पर्यटक और पिकनिक पार्टियां जुटती थीं, वहीं अब उस हरियाली का नामोनिशान तक नहीं बचा है। एक समय बेनापुर की चौड़ी बालू की जमीन पर हरी घास कालीन की तरह फैली रहती थी और चारों ओर घने पेड़-पौधे पर्यटकों को आकर्षित करते थे। लेकिन लगातार नदी कटाव के कारण अब अधिकांश पेड़ नदी में समा चुके हैं। पर्यटकों का कहना है कि इस तरह कटाव जारी रहा तो आने वाले कुछ वर्षों में यह पूरा पर्यटन केंद्र ही अस्तित्व खो सकता है। इस साल जनवरी के पहले सप्ताह में यहां सैकड़ों महिलाएं और युवा पिकनिक मनाने पहुंचे थे। भीड़ को देखते हुए बागनान थाने की ओर से अस्थायी पुलिस कैंप भी लगाया गया था। पेशे से शिक्षक सदानंद राय बताते हैं कि पिछले साल जब वे यहां आए थे, तब नदी किनारे पेड़ों की भरमार थी, लेकिन इस बार आने पर एक भी पेड़ नजर नहीं आया। स्थानीय लोगों की आजीविका भी इस पर्यटन केंद्र से जुड़ी है। पिकनिक सीजन में तिरपाल किराये पर देना, खान-पान की दुकानें और छोटे व्यवसाय यहां के लोगों के लिए आय का प्रमुख साधन हैं। नदी किनारे मोमो और चाइनीज फूड बेचने वाले सुरजीत मन्ना कहते हैं कि चार महीने के पिकनिक सीजन में अच्छी कमाई हो जाती है, लेकिन अगर यह स्थान नदी में समा गया तो रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो जाएगा। इस मुद्दे पर बागनान के विधायक अरुणाभ सेन ने कहा कि लंबे समय से रूपनारायण नदी की ड्रेजिंग नहीं होने के कारण यह समस्या गंभीर हुई है। ड्रेजिंग होने पर ही नदी तट को बांधा जा सकता है। उन्होंने इसके लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि नदी कटाव रोकने में केंद्र ने अपनी भूमिका नहीं निभाई।