कोलकाता : पश्चिम बंगाल के श्रम मंत्री अर्जुन सिंह ने जूट के बड़े बोरों की कीमत से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह से हस्तक्षेप की मांग की है। श्रम मंत्री ने कहा कि इस मामले का जूट मिलों की श्रम और पूजा बोनस संबंधी देनदारियों को पूरा करने की क्षमता पर सीधा असर पड़ता है। हाल के एक पत्र में सिंह ने केंद्र से आग्रह किया कि अगस्त 2026 के लिए 'बी टविल जूट' के बोरों की कीमत की समीक्षा कर उसे अगस्त 2024 में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित शुल्क आयोग के सूत्र के अनुसार फिर से अधिसूचित किया जाए। उन्होंने कहा कि जूट आयुक्त कार्यालय द्वारा तय की गई कीमत मंजूर सूत्र के अनुरूप नहीं थी और इसमें मिलों द्वारा कच्चा जूट खरीदने पर आने वाली लागत को पर्याप्त रूप से शामिल नहीं किया गया था। सिंह ने पहले ही की जा चुकी आपूर्ति के लिए कीमत के अंतर की राशि का भी समायोजन करने का अनुरोध किया। पश्चिम बंगाल के श्रम मंत्री ने जुलाई में जारी किए गए उत्पादन नियंत्रण और आपूर्ति आदेश का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि ये आदेश महीने के आखिर में जारी किए गए, जिससे जूट मिलों को तय अवधि में बोरों का उत्पादन और उनकी जांच पूरी करने में कठिनाई हुई। उन्होंने कहा कि हालांकि बाद में आपूर्ति की समयसीमा बढ़ा दी गई, लेकिन जुलाई के आदेशों के तहत आने वाले बोरों पर अगस्त की कम दर लागू की गई। इससे जूट मिलों पर काफी वित्तीय असर पड़ा। उन्होंने यह भी प्रस्ताव किया कि उत्पादन नियंत्रण और आपूर्ति आदेश जारी होने की तारीख से बोरों के उत्पादन और जांच के लिए कम से कम 30 दिन की अवधि तय की जाए। यदि आदेश देर से जारी होने के कारण आपूर्ति की समयसीमा बढ़ती है, तो आदेश जारी होने वाले महीने की लागू दर ही जारी रखी जाए। उन्होंने कपड़ा मंत्रालय, जूट आयुक्त, राज्य के श्रम विभाग और उद्योग प्रतिनिधियों की जल्द बैठक बुलाने का भी अनुरोध किया। सिंह ने कहा कि यह बैठक पूजा बोनस के भुगतान की समयसीमा से पहले हो तो बेहतर होगा।