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अहमदाबाद का कांकड़िया बना देश का पहला ‘वॉटर न्यूट्रल’ कोचिंग डिपो

पौधों से पानी शुद्ध कर रचा इतिहास

मेघा, सन्मार्ग संवाददाता

नई दिल्ली/अहमदाबाद : पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ी पहल करते हुए कांकड़िया कोचिंग डिपो देश का पहला ‘वॉटर न्यूट्रल’ रेलवे डिपो बन गया है। इस उपलब्धि के साथ भारतीय रेलवे ने जल संरक्षण और सतत विकास की दिशा में एक नया मानक स्थापित किया है।

इस डिपो में हर दिन करीब 1.60 लाख लीटर पानी की बचत हो रही है, जो लगभग 300 घरेलू पानी टैंकों के बराबर है। यह संभव हुआ है उन्नत अपशिष्ट जल शोधन और पुनः उपयोग प्रणाली के जरिए, जिससे ताजे पानी पर निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आई है।

इस परिवर्तन की सबसे खास बात है ‘फाइटोरेमेडिएशन’ तकनीक का उपयोग। फाइटोरेमेडिएशन एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसमें पौधों की मदद से गंदे पानी को साफ किया जाता है। डिपो में कोच धुलाई और रखरखाव के दौरान निकलने वाले अपशिष्ट जल को इसी तकनीक से शुद्ध किया जा रहा है।

शोधन की पूरी प्रक्रिया कई चरणों में होती है। सबसे पहले वेटलैंड आधारित प्रणाली में पौधे पानी से अशुद्धियां सोखते हैं और उसकी गुणवत्ता सुधारते हैं। इसके बाद अंतिम चरण में कार्बन और सैंड फिल्ट्रेशन के साथ यूवी डिसइन्फेक्शन किया जाता है, जिससे पानी पूरी तरह सुरक्षित होकर दोबारा उपयोग के योग्य बन जाता है।

यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देती है, बल्कि पानी की खपत कम होने से आर्थिक बचत भी सुनिश्चित करती है। साथ ही, यह परियोजना पर्यावरण मानकों के अनुरूप है, जिससे सतत विकास और नियमों का पालन दोनों सुनिश्चित हो रहा है।

दैनिक बचत को जोड़ें तो सालाना लगभग 5.84 करोड़ लीटर पानी का संरक्षण हो रहा है। यह डिपो अब भारतीय रेलवे में जल प्रबंधन का एक आदर्श मॉडल बनकर उभरा है।

इस उपलब्धि के साथ भारतीय रेलवे ने यह संदेश दिया है कि आधुनिक तकनीक और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग से पारंपरिक ढांचे को भी पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा सकता है। कांकड़िया कोचिंग डिपो की यह पहल हरित और टिकाऊ रेलवे संचालन की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है।

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