रेल मंत्रालय के अनुसार, भारतीय रेलवे प्रत्येक यात्रा में एसी श्रेणी के यात्रियों को बेडरोल किट उपलब्ध कराता है। इस किट में दो बेडशीट, एक तकिए का कवर और एक हैंड टॉवल शामिल होता है। इनमें से एक बेडशीट सीट पर बिछाने के लिए तथा दूसरी कंबल के नीचे उपयोग करने के लिए दी जाती है, ताकि कंबल सीधे यात्री के शरीर के संपर्क में न आए। इस अतिरिक्त बेडशीट को प्रत्येक उपयोग के बाद अनिवार्य रूप से धोया जाता है।
यात्रियों के सफर को और आरामदायक बनाने के लिए रेलवे ने पायलट आधार पर नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे की ट्रेनों तथा कामाख्या-हावड़ा वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में सभी एसी यात्रियों को कंबल कवर उपलब्ध कराना भी शुरू किया है। इस पहल को यात्रियों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है।
रेलवे ने बताया कि सभी मैकेनाइज्ड लॉन्ड्रियों में लिनन की सफाई की गुणवत्ता जांचने के लिए व्हाइटो-मीटर (Whito-Meter) का उपयोग किया जा रहा है। साथ ही, लॉन्ड्री संचालन की निगरानी के लिए सभी लॉन्ड्रियों में सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं।
अब नई AI आधारित कैमरा तकनीक के माध्यम से पुणे मंडल (मध्य रेलवे) तथा जयपुर और जोधपुर मंडल (उत्तर पश्चिम रेलवे) की लॉन्ड्रियों में धुले हुए लिनन पर बचे दागों की स्वत: पहचान की जाएगी। यदि यह पायलट परियोजना सफल रहती है, तो भविष्य में इसे अन्य रेलवे जोनों की लॉन्ड्रियों में भी लागू किया जा सकता है।
रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया कि विभिन्न लिनन वस्तुओं की निर्धारित उपयोग अवधि (कोडल लाइफ) रेलवे नियमों के अनुसार तय है और समय-समय पर इसकी समीक्षा की जाती है। जो लिनन उपयोग योग्य नहीं रहता, उसे निर्धारित मानकों के अनुसार बदल दिया जाता है।
रेलवे द्वारा निर्धारित लिनन की उपयोग अवधि इस प्रकार है:
बेडशीट: हैंडलूम – 12 माह, केवीआईसी की पॉलीवस्त्र बेडशीट – 24 माह
तकिए का कवर: 9 माह
हैंड टॉवल: 9 माह
तकिया: 24 माह
ऊनी कंबल: 24 माह
यह जानकारी केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।