file photo of metro train 
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चार दशकों का सफर: छोटी सुरंग से महानगर की लाइफलाइन तक

हावड़ा से सेक्टर फाइव अब मिनटों में, एयरपोर्ट तक सीधी पहुंच ऑरेंज लाइन से मजबूत हुआ दक्षिण और पूर्व कोलकाता का कनेक्शन

मेघा, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : कोलकाता मेट्रो पिछले चार दशकों से शहर के रोजमर्रा के जीवन का अभिन्न हिस्सा रही है। वर्ष 1984 में एक छोटे से भूमिगत खंड के रूप में शुरू हुई यह सेवा आज कोलकाता महानगर क्षेत्र की शहरी परिवहन व्यवस्था की रीढ़ बन चुकी है, जो हावड़ा, हुगली, नदिया, उत्तर और दक्षिण 24 परगना जैसे जिलों तक फैली हुई है। हाल के वर्षों में मेट्रो नेटवर्क अपने सबसे महत्वपूर्ण विस्तार चरण में पहुंचा है, जिसने लोगों के आवागमन के तरीके को बदल दिया है। 1972 से 2014 के बीच मेट्रो का विस्तार केवल 28 किलोमीटर तक सीमित रहा। लेकिन 2014 के बाद तस्वीर पूरी तरह बदल गई। बीते एक दशक में 45 किलोमीटर से अधिक नई मेट्रो लाइनों का उद्घाटन हुआ है, जो कोलकाता मेट्रो के इतिहास में सबसे तेज विस्तार का दौर है। इसी अवधि में निवेश भी 5,981 करोड़ रुपये से बढ़कर जुलाई 2025 तक 25,515 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। मार्च 2024 में कोलकाता मेट्रो ने हुगली नदी के नीचे देश की पहली अंडरवाटर मेट्रो टनल शुरू कर इतिहास रच दिया। ग्रीन लाइन ने हावड़ा मैदान को एस्प्लेनेड से जोड़ा। इसके बाद अगस्त 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ही दिन में तीन बड़े कॉरिडोर—ईस्ट-वेस्ट ग्रीन लाइन, येलो लाइन (एयरपोर्ट कनेक्टिविटी) और ऑरेंज लाइन—का उद्घाटन किया। इन विस्तारों के 5 महीने बाद ही असर साफ दिखने लगा है। हावड़ा मैदान से सॉल्टलेक सेक्टर फाइव की यात्रा अब लगभग 35 मिनट में पूरी हो जाती है। येलो लाइन ने एयरपोर्ट तक सीधी और भरोसेमंद कनेक्टिविटी दी है, जबकि ऑरेंज लाइन ने दक्षिण और पूर्व कोलकाता को तेज रेल विकल्प से जोड़ा है। दुर्गापूजा 2025 के दौरान मेट्रो ने अपनी क्षमता का सफल परीक्षण किया, जब पंचमी से नवमी तक करीब 43.7 लाख यात्रियों ने इसका उपयोग किया। 2026 की शुरुआत तक कोलकाता मेट्रो पांच रंग-कोडेड लाइनों पर 73 किलोमीटर से अधिक फैल चुकी है। हालांकि, कुछ कॉरिडोरों में भूमि अधिग्रहण, ट्रैफिक डायवर्जन और प्रशासनिक अड़चनों के कारण काम में देरी बनी हुई है। फिर भी, कोलकाता मेट्रो आज सचमुच एक शहरव्यापी नेटवर्क बनकर उभरी है।

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